कश्मीर में VIP सुरक्षा पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप्रूफ घेरे में रहेंगे नेता, कमांडो तैनात

जम्मू-कश्मीर में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुए जानलेवा हमले की कोशिश के बाद प्रदेश में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है. प्रशासन ने कई संरक्षित व्यक्तियों (प्रोटेक्टियों) की सुरक्षा की समीक्षा करते हुए अतिरिक्त कदम उठाए हैं. सूत्रों के अनुसार, अब जम्मू और कश्मीर पुलिस के अलावा और जवान फारूक अब्दुल्ला के साथ उनकी यात्रा के दौरान तैनात रहेंगे, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है.

उनके हर सार्वजनिक कार्यक्रम में अब एक गजेटेड पुलिस अधिकारी की अनिवार्य मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी. इसके अलावा, जिन स्थानों पर संरक्षित लोग कार्यक्रम में शामिल होंगे, वहां सुरक्षा प्रबंधों को भी और मजबूत किया गया है. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे कार्यक्रमों के दौरान विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं.

गोली चलाने वाले का निशाना चूका था

हाल ही में जम्मू में एक कार्यक्रम के दौरान फारूक अब्दुल्ला पर गोली चलाने की कोशिश की गई थी, जिसमें वह बाल-बाल बच गए थे. घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदेश में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है. केंद्र सरकार ने बुधवार रात फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले में सुरक्षा में हुई चूक की जांच शुरू कर की है. इस घटना में 63 साल का एक शक्स शादी समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री के बिल्कुल करीब तक पहुंच गया और उसने गोली चला दी. अब्दुल्ला बाल-बाल बच गए, क्योंकि कमल सिंह जमवाल का निशाना चूक गया.

दो लोगों के पास थी Z-Plus सुरक्षा

इस समारोह में कई VIP मौजूद थे, जिनमें दो ऐसे लोग भी शामिल थे जिन्हें ‘Z-Plus’ सुरक्षा भी मिली हुई थी. सीएम उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी. जिन्हें ‘Z-Plus’ सुरक्षा दी जाती है उन व्यक्तियों को कम से कम आधा दर्जन NSG कमांडो मिलते हैं. इसके अलावा, उन्हें सुरक्षा के दो-तीन घेरे भी मिलते हैं. इनमें स्थानीय पुलिस और दूसरे सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं. साथ ही उन्हें एक बुलेट-प्रूफ गाड़ी और एस्कॉर्ट भी दिया जाता है. हर सुबह, ‘Z-Plus’ सुरक्षा प्राप्त शख्स का पूरा कार्यक्रम उनके आने-जाने का शेड्यूल भी शामिल होता है और ये सुरक्षा विंग को भेजा जाता है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जिस रास्ते से उन्हें गुजरना है और जिन जगहों पर उन्हें जाना है, वहां की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से पुख्ता हो.

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