जज्बे को सलाम! इस सरकारी स्कूल ने पेश की मिसाल, मेंटेनेंस फंड से स्मार्ट क्लास और हाईटेक एजुकेशन का सपना किया सच

राजगढ़ : राजगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मोरपीपली गांव का शासकीय प्राथमिक स्कूल बड़े शहरों के महंगे निजी स्कूल से बेहतर है. इस शासकीय सेटेलाइट प्राइमरी स्कूल में गांव के बच्चों के लिए वे तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो प्राइवेट स्कूल में दी जाती है.

खास बात ये है कि इस स्कूल को आधुनिक बनाने में कहीं से कोई फंड नहीं लिया गया. हर साल स्कूल के मेंटेनेंस के लिए जो राशि मिलती है, उसी से स्कूल का कायाकल्प किया गया है. इस काम में यहां तैनात दो टीचर का बड़ा योगदान है.

ऐसी सुविधाएं तो निजी स्कूलों में नहीं हैं

मोरपीपली गांव के इस सेटेलाइट स्कूल में 2 शिक्षक हैं. एक पुरुष और दूसरी महिला. स्कूल में कुल 42 बच्चे पढ़ रहे हैं. यहां सारे बच्चे प्रॉपर ड्रेस स्कूल आते हैं. सभी बच्चे अनुशासित हैं. दोनों टीचर ने मिलकर क्लास को सुसज्जित कर रखा है. लिखने के लिए मेज भी हैं. मनोरंजन के लिए एलईडी और प्ले ग्राउंड में खिसक पट्टी वा सीखने सिखाने के लिए उपकरण भी मौजूद हैं.

शिक्षकों ने सरकारी राशि का सदुपयोग किया

स्कूल के शिक्षक प्रियांक शुक्ला कहते हैं “जिस गांव ने ड्रॉप आउट के चांसेज ज्यादा होते हैं, वहां सरकार ने सेटेलाइट स्कूल शुरू किए हैं. सेटेलाइट स्कूल में आसपास जाने के बजाय बच्चे गांव में ही पढ़ें और उनका अच्छा बेस तैयार हो, यही मकसद है. वह जब इस स्कूल में आए थे तो एक ही कमरा था. बारिश में क्लास में टपकता था. इसके बाद उन्होंने स्कूल के रखरखाव के लिए शासन से मिलने वाली राशि का सदुपयोग किया.”

मेंटेनेंस के मिलते हैं हर साल 10 हजार

प्रियांक शुक्ला के अनुसार “एक साल में मिलने वाली राशि 10 हजार होती है. इस प्रकार दो साल में 20 हजार जमा हुए तो सबसे पहले स्कूल का लेंटर सही कराया. दीवारों पर रंग-बिरंगी पेंटिंग करवाई. शिक्षिका सरोज पंवार ने ये डिजाइन किया है. दोनों टीचर्स ने मिलकर स्कूल को संवार दिया.”शिक्षक प्रियांक शुक्ला व सरोज पंवार बताते हैं “यहां बच्चे पढ़ाई के साथ पर्यावरण और भारतीय संस्कृति की जानकारी लेते हैं. जब ये बच्चे प्राइमरी स्कूल पूरा करने के बाद छठी क्लास से दूसरे स्कूल में जाएंगे तो सबसे आगे रहेंगे. बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया गया है.”

पूरे जिले में मोरपीपली के स्कूल की चर्चा

जहां एक ओर गांव के सरकारी स्कूल बदहाल हैं. बारिश में स्कूल भवन के गिरने का खतरा रहता है. वहीं, मोरपीपली गांव का प्राइमरी स्कूल एक नजीर है. इस स्कूल के दोनों टीचर ने ये दिखा दिया है कि सरकारी राशि का सदुपयोग कैसे किया जा सकता है. इस स्कूल की चर्चा पूरे जिले में होती है. जो भी शिक्षा अधिकारी यहां का दौरा करता है तो देखकर दंग रह जाता है.

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