पंजाब विधानसभा चुनाव 2027: चरणजीत चन्नी के कंधों पर होगी कमान या कांग्रेस चुनेगी नया कप्तान?

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की अगुआई की तस्वीर साफ होती जा रही है. कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी की अगुआई में ही कांग्रेस चुनावी अखाड़े में उतरेगी. इसके संकेत कांग्रेस की मनरेगा बचाओ रैलियों से मिलने शुरू हो गए हैं, जिनमें सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सीएम कुर्सी का दावा छोड़ दिया है. पूर्व कांग्रेस प्रधान नवजोत सिद्धू पहले ही एक्टिव पॉलिटिक्स से बाहर हो चुके हैं.

हालांकि कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप बाजवा जरूर अभी अड़े हुए हैं. वह रैलियों में सरकार आने पर जिस तरह से कार्रवाई का ऐलान कर रहे हैं, उससे लग रहा है कि वह अभी भी खुद को सीएम चेहरे की दौड़ में बनाए हुए हैं.

इसके उलट चन्नी पार्टी के भीतर साइलेंट पॉलिटिक्स कर रहे हैं. चन्नी को अगले मुख्यमंत्री के तौर पर भले ही कांग्रेस के भीतर और सोशल मीडिया पर चन्नी को सपोर्ट मिल रहा हो लेकिन वह खुद कोई दावा नहीं कर रहे.

चरणजीत चन्नी की दावेदारी मजबूत क्यों?

3 महीने के कार्यकाल में लोकप्रिय हुए: 2021 में जब कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम की कुर्सी से हटाया तो चरणजीत चन्नी मुख्यमंत्री रहे. उन्हें सिर्फ तीन महीने मिले लेकिन चन्नी के फैसलों को लेकर कांग्रेस खूब सुर्खियों में रही.

विवादित बयानबाजी से दूर: चरणजीत चन्नी सिर्फ कांग्रेस की पॉलिटिक्स कर रहे हैं. न तो वह पार्टी की गुटबाजी में घुस रहे हैं और न ही सीएम कुर्सी या पार्टी से जुड़े किसी मुद्दे पर बात कर रहे हैं.

ग्राउंड वर्क में जुटे: कांग्रेस के दिग्गजों की विरोधियों को घेरने की रणनीति के उलट चरणजीत चन्नी अपनी आम आदमी की छवि मजबूत करने के लिए ग्राउंड वर्क में जुटे हैं. हाल ही में वह एक पुराने बीमार कांग्रेस से मिलने पहुंच गए.

2027 में कांग्रेस की क्या स्थिति?

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मौजूदा राजनीतिक हालात देखें तो पंजाब में आप के मुकाबले अभी कांग्रेस ही नजर आती है. अकाली दल ने तरनतारन उपचुनाव और जिला परिषदब्लॉक समिति उपचुनाव में अच्छी परफॉर्मेंस जरूर दिखाई लेकिन अभी वे बराबरी के मुकाबले में नजर नहीं आते.

भाजपा जरूर वोट शेयर बढ़ा रही है लेकिन गांवों में आधार नहीं है. कांग्रेस हाईकमान के पास भी ये अच्छा मौका है क्योंकि पंजाब उन राज्यों में से एक है, जहां भाजपा की राजनीतिक पकड़ कमजोर है। ऐसे में यहां कांग्रेस के चांसेज ज्यादा हैं.

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