ब्राजील में ‘नार्को-आतंकवाद’ पर बड़ी कार्रवाई: ड्रग माफियाओं पर खूनी रेड, 130 की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट सख्त, मांगी विस्तृत रिपोर्ट

ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में की तरफ से पुलिस ड्रग संगठन रेड कमांड के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन चलाया गया है. राजधानी रियो डी जनेरियो में मंगलवार सुबह 2500 पुलिसकर्मियों ने हेलीकॉप्टर से एक साथ कई इलाकों में छापा मारा है. हालांकि इस छापेमारी के दौरान अब तक 130 लोगों की मौत हो चुकी है. जिनमें 4 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. आम लोग पुलिस पर बल प्रयोग करने के आरोप लगा रहे हैं. यही वजह है कि वे राज्यपाल से इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन भी कर रहे हैं. पूरे मामले पर अब ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने भी रिपोर्ट मांगी है.

संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने इस “नरसंहार” पर चिंता जताई है, जो ब्राजील के इतिहास में सबसे घातक पुलिस अभियानों में से एक है. अधिकारी “नारको-आतंकवाद” से लड़ने का दावा कर रहे हैं, लेकिन नागरिक न्याय की मांग कर रहे हैं.

हालांकि पुलिस पर लग रहे आरोपों के जवाब में कहा गया कि जैसे ही पुलिस की टीमें आगे बढ़ीं, रेड कमांड गैंग के सदस्यों ने फायरिंग शुरू कर दी थी. इसके साथ ही गैंग ने सड़कों पर जलते हुए बेरिकेड्स लगाए और ड्रोन से बम गिराए. ऐसा करके वे पुलिस को रोकना चाहते थे.

ब्राजील की सड़कों पर बिछी लाशें

पुलिस रेड में अब तक 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. जनता ने शवों को सड़कों पर रखकर प्रदर्शन किया. यह पुलिस ऑपरेशन ब्राजील के हाल के इतिहास में सबसे हिंसक ऑपरेशनों में से एक था. यही वजह है कि मानवाधिकार संगठनों ने इस दौरान हुई मौतों की जांच की मांग की है.

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी ऑपरेशन की रिपोर्ट

पुलिस की तरफ से चलाया गया ऑपरेशन शुरुआत से ही चर्चा का विषय बना हुआ है. अब ऐसे में कोर्ट ने मृतकों की संख्या और शवों की स्थिति को लेकर सवाल उठाया है. इसके साथ ही मृतकों के शरीर के टुकड़े अलग होने और चाकू के घावों की खबरें भी आईं हैं.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एलेक्जेंडर डी मोरेस ने कास्त्रो को पुलिस कार्रवाई के बारे में जानकारी देने का आदेश दिया है. इसके साथ ही अगले सोमवार को रियो में राज्य के राज्यपाल और सैन्य एवं नागरिक पुलिस प्रमुखों के साथ सुनवाई निर्धारित की.

लोगों का गुस्सा आ रहा सामने

पुलिस की इस कार्रवाई से हर कोई नाराज बताया जा रहा है. यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर विरोध भी शुरू हो गया है. आम लोगों ने कहा कि यह पुलिस ऑपरेशन नहीं बल्कि एक नरसंहार है. 56 वर्षीय कार्यकर्ता रूट सेल्स ने कहा, “क्या हमें मौत की सजा मिल सकती है? हमें मारना बंद करो” रियो के गरीब, उत्तरी क्षेत्र पेन्हा से कई निवासी मोटरसाइकिलों पर भव्य गुआनाबारा पैलेस आए थे.

पुलिस की तरफ से क्या कहा गया?

इस पूरे ऑपरेशन को लेकर उठ रहे सवालों के बाद पुलिस ने कहा कि उनका यह ऑपरेशन ड्रग कारोबारियों के खिलाफ है. ये लोग हथियारों से लैश होते हैं. इसके साथ ही जंगली इलाकों में भी ये बड़ी संख्या में एक्टिव हैं. पुलिस का कहना है कि रेड कमांड पिछले कुछ महीनों से लगातार नए इलाकों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा था.

इतना ही नहीं वह दूसरे संगठन थर्ड प्योर कमांड (TCP) के इलाके में भी घुस रहा था, जिसकी वजह से हिंसक घटनाएं हो रही थीं. पुलिस ने कहा कि इसे रोकने के लिए कॉम्प्लेक्स दो अलेमाओ और कॉम्प्लेक्स दा पेन्हा में रेड कमांड के ठिकानों पर हमले किए गए. हमारा मकसद रेड कमांड के ठिकानों को बर्बाद करना था.

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