महाराष्ट्र: विवादों में ‘माझी लाडकी बहिन योजना’, विपक्ष और राज्य के कृषि मंत्री ने लगाए ये आरोप

महाराष्ट्र में बहुचर्चित ‘माझीलाडकीबहिन योजना को लेकर विवाद गहरा गया है. 2 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन ने एमपी की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी इस योजना को लागू किया और चुनाव प्रचार में इसका भरपूर इस्तेमाल किया. इतना ही नहीं, चुनाव से पहले महिलाओं के बैंक खातों में 1500 रुपए की कुल 5 किस्तें भी जमा कराई गईं और दावा किया गया कि चुनाव जीतते ही यह किस्त बढ़कर 2100 रुपए हो जाएगी.

राज्य की महिलाओं ने महायुति को चुनाव जिताया, लेकिन अब तक उनके खाते में 2100 रुपये की रकम नहीं आई है. राज्य के कृषि मंत्री ने यहां तक ​​कह दिया कि लाडकी बहिन योजना की वजह से किसानों की कर्जमाफी योजना प्रभावित हो रही है. महाराष्ट्र सरकार द्वारा शुरू की गई ‘माझीलाडकीबहिन योजना’ अब विवादों में आ गई है. विधानसभा चुनाव में वादा किया गया था कि चुनाव जीतने के बाद इस योजना की राशि 1500 से बढ़ाकर 2100 कर दी जाएगी. लेकिन चुनाव जीतते ही इस योजना के लाभार्थियों की जांच शुरू कर दी गई.

इस प्रक्रिया से परेशान होने की जरूरत नहीं- अदिति तटकरे

आरोप है कि बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस योजना के तहत दो बार पंजीकरण कराया और दो बार पैसे लिए. एक ही घर की 4 से 5 महिलाओं ने इस योजना का लाभ उठाया. जिनके पास 4 पहिया वाहन हैं वे भी लाभार्थी बन गईं और जो शादी करके दूसरे राज्य में चले गए वे भी इस योजना के लाभार्थी बन गए. इतना ही नहीं, जिनकी सालाना आय 2.5 लाख से अधिक है वे भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं. अब सरकारी मशीनरी ऐसे लाभार्थियों की सूची बनाकर उन्हें इस योजना से हटा रही है.

अब तक 1.5 करोड़ से अधिक महिलाएं इस योजना से जुड़ चुकी हैं, जबकि सूची छांटने के बाद यह संख्या करीब 25 लाख कम हो जाएगी. वहीं, राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे का कहना है कि पात्र लाभार्थियों को क्रॉस वेरिफिकेशन प्रक्रिया से परेशान होने की जरूरत नहीं है. अदिति तटकरे ने कहा कि पिछले 2 महीनों में हमेंलाडकी बहिन योजना लाभार्थियों के बारे में कुछ शिकायतें मिली हैं, जिनके आधार पर क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाएगा. आईटी विभाग की मदद ली जा रही है. आधार कार्ड का क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों को इस प्रक्रिया से परेशान होने की जरूरत नहीं है. हमारा उद्देश्य है कि अधिकतम लाभार्थियों को योजना का लाभ मिले. लेकिन हमें जो शिकायतें मिली हैं, उनका समाधान करने की जरूरत है. इस योजना का उद्देश्य राज्य की महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना है. जिनके परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपए से कम है.

विपक्ष और राज्य के कृषि मंत्री ने भी लगाया आरोप

महाराष्ट्र सरकार की ‘माझीलाडकीबहिन योजना’ को लेकर कई विवाद सामने आए हैं. विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनावी फायदे के लिए बिना उचित जांच के इस योजना को शुरू किया गया, जिसके कारण अपात्र लाभार्थियों को भी इसका फायदा मिला. शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि सरकार ने वोट पाने के लिए मानदंडों को सख्ती से लागू किए बिना लाभार्थियों को पैसे बांटे. राउत कहते हैं, ‘वह सिर्फ चुनावी नारा था, चुनाव से पहले पैसे देकर वोट लिए गए, उसके बाद मामला खत्म हो गया.’

वहीं, महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे ने भी आरोप लगाया कि लड़की बहन योजना के कारण किसानों के हित की कई योजनाएं बंद हो गईं. उन्होंने अपनी ही सरकार पर लाडकी बहिन योजना पर 45 हजार करोड़ और किसान कर्ज योजना पर 15 हजार करोड़ हर साल बांटने का आरोप लगाया. अब अगर हमारे मंत्रालय को और पैसा मिलेगा तो हम किसानों को किसान सम्मान योजना का लाभ दे पाएंगे. वैसे भी इस योजना का पैसा महिलाएं लेती हैं और सिर्फ प्रपंच पर खर्च करती हैं.

उन्होंने कहा, ‘आप सभी जानते हैं कि हमारे घर में भी महिलाएं हैं. महिलाओं को दिया जाने वाला पैसा अब सिर्फ प्रपंच पर खर्च होता है. लड़की बहन योजना का पैसा भी इधर-उधर किया गया. बच्चों के लिए ये लो, उनके लिए वो लो. बेकार का खर्च, और कुछ नहीं.’ उनका कहना है कि जो महिलाएं लाडली बहन योजना में सरकारी पैसा ले रही हैं, उन्हें किसान सम्मान योजना में पैसा नहीं लेना चाहिए. मुझे बताइए कि एक महिला दो सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे ले सकती है? सरकार को इस पर जीआर लाना चाहिए.

विपक्ष ने इसमें बाधा डालने की कोशिश की- शिंदे

वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया है कि इस योजना को बंद नहीं किया जाएगा और पात्र लाभार्थियों को सहायता मिलती रहेगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने लाडकी बहिन योजना शुरू की थी, लेकिन विपक्ष ने इसमें बाधा डालने की कोशिश की. फिलहाल ‘लड़की बहन योजना’ को बंद नहीं किया गया है. हालांकि, सरकार ने संकेत दिया है कि पात्रता मानदंडों की सख्ती से जांच की जाएगी ताकि केवल पात्र लाभार्थियों को ही इसका लाभ मिल सके. इससे यह सुनिश्चित होगा कि योजना का उद्देश्य सही लाभार्थियों तक पहुंचे और किसी भी तरह की अनियमितता से बचा जा सके.

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