प्रसिद्ध माता तुलजा और माँ चामुंडा टेकरी पर माता के दरबार मे चैत्र नवरात्र के पहले दिन उमड़ी भक्तो की भीड़

देवास शहर के मध्य पहाड़ पर स्थित माता चामुंडा और माता तुलजा के सिद्ध शिखर और रक्तपिठ पर चैत्र नवरात्र के पहले ही दिन से अल सुबह देवास स्थित प्रसिद्द माता चामुंडा – माता तुलजा टेकरी पर श्रद्धालुओ का सैलाब उमड़ पड़ा …वही माता चामुंडा और माता तुलजा टेकरी पर नवरात्र की सुबह महाआरती के बाद घट स्थापना के साथ चैत्र नवरात्र पर्व की शुरुवात हुई । 

माता चामुंडा और माता तुलजा के इस सिद्ध मंदिर में चैत्र नवरात्र के दौरान हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या श्रद्धालुओ के इस वर्ष पहुचने की उम्मीद है । यहाँ पूरे प्रदेश के साथ साथ भारत वर्ष से भक्त माँ के सिद्ध रूप के दर्शन करने हर वर्ष नवरात्र के दौरान आते है । माता टेकरी पर शारदीय और चैत्र नवरात्र प्रारम्भ होते ही भक्तो का जनसैलाब माता के दर्शनों को उमड़ पड़ता है । 

मान्यता भी है,कि माता अपने भक्तों की झोली भर ही देती हैं । प्रसाशन और पुलिस ने भी माता टेकरी पर सुरक्षा के इंतजाम भी किये है,जहाँ अलग अलग जगहों पर पुलिस जवान तैनात दिखाई दिए 

माता चामुंडा और माता तुलजा भवानी से जुडी मुख्य मान्यता यह है,कि यहाँ दरबार में पहुचे भक्त इस दरबार से कभी खाली हाथ नहीं लौटते । ऐसी मान्यता है,कि माँ अपने भक्तो को अपने दर से खाली नहीं जाने देती और हर मुराद पूरी करती है । माता तुलजा और माँ चामुंडा का यह सिद्ध शक्ति पीठ और रक्त पीठ भी माना जाता है । 
यहाँ पुरे प्रदेश के साथ भारत वर्ष से भक्त माँ के सिद्ध रूप के दर्शन करने हर वर्ष नवरात्र के दौरान आते है ।

माता टेकरी पर शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र प्रारम्भ होते ही भक्तो का जनसैलाब माता के दर्शनों को उमड़ पड़ता है । इस दौरान भक्तो ने भी माँ के चमत्कारों को अपने भावुक शब्दो में बयां किया । माता चामुंडा और माँ तुलजा भवानी का देवास स्थित प्रसिद्ध मंदिर माता का रक्त पीठ भी कहलाता है,जो कि विक्रमादित्य कालीन मंदिर है । बड़ी माता तुलजा भवानी और छोटी माता चामुंडा माता के साथ यहाँ हनुमान जी,भैरव नाथ,अन्नपूर्णा माता और अन्य देवी देवताओं के भी सिद्ध मंदिर मौजूद है जहां दर्शनों के लिए वर्ष भर भी देश प्रदेश के श्रद्धालु बड़ी ही आस्था के साथ पहुचते है ।

माता तुलजा और चामुंडा के दर्शनों के लिये फिलहाल तीन प्रमुख मार्ग हैं सीढ़ी मार्ग जिसे सिंह द्वार कहा जाता है ,रपट मार्ग को शंख द्वार कहा जाता है और धुनि मार्ग भी है । इसके अलावा पिछले कई वर्षों से रोपवे की सुविधा भी माता तुलजा चामुंडा टेकरी पर शुरू हुई है । इस वर्ष भी चैत्र नवरात्र के 9 दिनों में भारी संख्या में भक्तों के माता चामुंडा, माँ तुलजा टेकरी पर दर्शन करने का अनुमान है  । 
श्रद्धालु माता की महिमा का वर्णन करते नहीं थकते हैं,क्योंकि मां की महिमा है ही इतनी निराली । भक्तों के अनुसार माता तुलजा और चामुंडा उनकी हर मुराद पूरी करती है ।
साथ ही इस स्थान की मान्यता है,कि यहां पर देवी दिन में तीन रूप बदलती हैं , सुबह बाल्यावस्था,दोपहर में युवावस्था और रात्रि के समय वृद्धावस्था में मां अपने भक्तों  को दर्शन देती है,साथ ही और भी कई किवदंतीतीया और मान्यताएं इस मंदिर से जुड़ी हुई हैं । 
देवास शहर के मध्य ऊंचे पहाड़ पर माता तुलजा भवानी और माता चामुंडा के प्रसिद्ध मंदिर के साथ अन्य मंदिर भी यहां पर स्थित है,जिनके दर्शन करने के लिए वर्ष भर श्रद्धालुओं का ताता यहां पर लगा रहता है । 

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