तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी ने सरकारी कर्मचारियों के रिश्तेदारों को दी थी नियम विरुद्ध नियुक्ति

जांजगीर-चांपा: जांजगीर-चांपा जिले में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर अपात्र लोगों को अनुकंपा नियुक्ति देने के मामले में राज्य सरकार ने तत्कालीन DEO केएस तोमर को सस्पेंड कर दिया है। निलंबन अवधि में उन्हें DPI रायपुर अटैच किया गया है। बुधवार को निलंबन आदेश जारी किया गया।जांजगीर-चांपा के तत्कालीन DEO केएस तोमर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। वे अब लोक शिक्षण संचालनालय नवा रायपुर में अटैच रहेंगे। तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी केएस तोमर पर लॉकडाउन के दौरान शासकीय अनुदान प्राप्त सरस्वती हायर सेकेंडरी स्कूल गोधना में बैक डोर से भर्ती का मामला भी अभी लंबित है। सरकार ने इसे निरस्त करने को कहा है, हालांकि अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।जांजगीर-चांपा के शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा तत्कालीन डीईओ केएस तोमर ने किया था। उन्होंने अपने कार्यकाल में 5 ऐसे लोगों को अनुकंपा नियुक्ति दी थी, जिन्होंने अपने पिता, भाई या अन्य करीबी रिश्तेदार की मौत के बाद शपथपत्र दिया था कि उनके घर में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी में नहीं है और न ही कोई आयकरदाता है, इसलिए वे खुद अनुकंपा के लिए पात्र हैं।शिक्षा विभाग में हुआ था फर्जीवाड़ा।सालभर चली जांच17 दिसंबर 2021 को डीईओ कार्यालय से किए गए इस फर्जीवाड़े का खुलासा ने किया था। तब डीईओ केएस तोमर के बाद आए डीईओ दिनेश कौशिक ने इस मामले की जांच कराई और गलत पाए जाने पर नियुक्ति निरस्त करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने इस मामले की जांच कराई। जांच में 5 अपात्रों को नियम विरुद्ध अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने संबंधी शिकायत की पुष्टि हुई है। जिसके बाद शिक्षा विभाग के अवर सचिव पुलक भट्टाचार्य ने तत्कालीन डीईओ केएस तोमर के सस्पेंशन का आदेश जारी किया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि DEO तोमर का यह काम छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण एवं नियम के विपरीत गंभीर कदाचार है।डीईओ दिनेश कौशिक ने कराई थी मामले की जांच।इन 5 अपात्रों को दी गई नियम विरुद्ध अनुकंपा नियुक्ति1. हेडमास्टर रामनायण पांडेय के निधन के बाद उनकी बहू मोनिका पांडेय को नियुक्ति दी गई है, जबकि उनका बेटा भी कोरबा जिले में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत है। 2. सहायक शिक्षक विनायक कांत के निधन के बाद उनकी शादीशुदा बहन को अनुकंपा नियुक्ति दी गई है, जबकि उनकी मां छतकुमारी कुर्रे भी हेडमास्टर हैं। 3. गणेशराम पोर्ते की शासकीय सेवा में रहते हुए मृत्यु हो गई थी। उसके बाद उनके बेटे जीतू पोर्ते को सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी बना दिया गया। गणेशराम की पत्नी लता पोर्ते भी शासकीय शिक्षक है। 4. व्याख्याता रामचन्द्र कश्यप की मौत के बाद उनके बेटे सौरभ सिंह कश्यप को अनुकंपा नियुक्ति दी गई। मृतक व्याख्याता की पत्नी रामकुमारी कश्यप भी गवर्नमेंट टीचर है। 5. एक और कर्मचारी आशुतोष दुबे की नियुक्ति भी नियमों को ताक पर रखकर हुई थी, जिसे निरस्त कर दिया गया था।संयुक्त संचालक ने 2021 में इन शिकायतों की जांच कराई, जिसमें ये सारा फर्जीवाड़ा सामने आ गया। जुलाई 2021 में डीईओ केएस तोमर को जांजगीर-चांपा से हटाकर लोक शिक्षण संचालनालय में नियुक्त कर दिया गया था।तत्कालीन जांजगीर-चांपा डीईओ केएस तोमर ने किया था फर्जीवाड़ा।2020 में हुई थी नियमों के खिलाफ अनुकंपा नियुक्तिकोरोना काल के दौरान साल 2020 में अपात्र लोगों को अनुकंपा नियुक्ति देने की शिकायत अधिवक्ता अश्विनी शुक्ला ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से की थी। इस पर संभागीय संयुक्त संचालक ने जांच के आदेश दिए और प्रतिवेदन मांगा। मामले की जांच में जिला शिक्षा अधिकारी डीके कौशिक ने अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता पाई थी। जिसमें पांच लोगों को फर्जी तरीके से अनुकंपा नियुक्ति दिया जाना पाया गया था।शातिर अधिकारी ने करतूतों को छिपाने के लिए लिया था शपथ पत्र।नियमों को दरकिनार कर दिवंगत शासकीय शिक्षक के बेटा, बहन और बहू को नियुक्ति दे दी गई थी, जबकि शासन के नियमानुसार किसी परिवार में अगर कोई सरकारी कर्मचारी है, तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। वहीं एक उम्मीदवार आशुतोष दुबे की अनुकंपा नियुक्ति को तत्कालीन डीईओ ने निरस्त कर दिया था और 4 उम्मीदवार मोनिका पांडेय सहायक ग्रेड-3, विभा बंजारे सहायक शिक्षक, जीतू पोर्ते सहायक ग्रेड-3 और सौरभ सिंह कश्यप भृत्य की जांच कर प्रतिवेदन सहायक संचालक को भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में इनकी भी नियुक्ति शासन के प्रावधान के विपरीत करने का मामला सामने आया था।राज्य सरकार ने जांच में आरोपों को पाया सही।करतूत छिपाने शपथपत्र को बनाया था आधारअनुकंपा नियुक्ति के इस फर्जीवाड़े में DEO तोमर ने अपनी करतूतों को छिपाने के लिए उम्मीदवारों से नोटरी करवाकर शपथपत्र लिया था। जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि उनके परिवार के कोई भी सदस्य शासकीय सेवा में नहीं है। उनके द्वारा प्रस्तुत की गई जानकारी असत्य पाए जाने पर उनकी नियुक्ति स्वत: समाप्त मानी जाएगी।

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