छोटे बेटे ने फर्जी वसीयत बनाकर भाभी ने हड़प ली पूरी प्रॉपर्टी

नीमच: मनासा के वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय रमेशचंद्र ओझा की पैतृक संपत्ती को हड़पने का मामला सामने आया है। स्वर्गीय ओझा के छोटे बेटे पीयूष ओझा ने मनासा थाने में शिकायत दर्ज करवाकर धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले भाभी लतीका ओझा, दलाल विवेक सोनी सहित अन्य लोगों पर प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है। स्वर्गीय इंदुमति ओझा की फर्जी वसीयत गुपचुप तरीके से तैयार की गई और फर्जी वसीयत में दान में दी हुई जमीन को आधार बनाया गया, जबकि उससे कई गुना ज्यादा संपत्ती का नामांतरण नगर परिषद मनासा द्वारा किया गया है।शिकायतकर्ता पीयूष कुमार ओझा ने शिकायत में उल्लेख किया कि माता इंदुमति ओझा का देहांत 7 मई 2021 को हुआ और इससे चार दिन पहले 3 मई को पिता रमेशचंद्र ओझा का देहांत हो गया था। पिताजी की पैतृक जमीन करीब 125 बाय 45 वर्गफीट जमीन पर खड़ा शेर गली मनासा में दो भाग में मकान है, जिनके नंबर 174 व 175 है। माता-पिता की मृत्यु के बाद दो भाई और एक बहन का अधिकार उक्त जमीन पर है, लेकिन भाभी लतीका ओझा ने पति अनूप ओझा, दलाल विवेक सोनी, पूर्व पार्षद हरीश एनिया, ननदोई नरेंद्र व्यास, ननद प्रीति व्यास से मिलकर फर्जी वसीयत तैयार की और इसी फर्जी वसीयत के आधार पर नगर परिषद मनासा में अक्टूबर 2021 को दोनों बड़े भूखंड के नामांतरण करवा लिए।नामांतरण में वसीयत को आधार बताया गया है, जिसमें स्वर्गीय इंदुमति ओझा द्वारा बहू लतीका ओझा के नाम वसीयत की गई। वसीयत में स्वर्गीय इंदुमति ओझा को उनकी सास स्वर्गीय मणीदेवी ओझा द्वारा दान में दिया गया मकान का उल्लेख किया गया है, सिर्फ दानपत्र का उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार पूरी पैतृक संपत्ति भूखंड क्रमांक 174, 175 का नामांतरण कर दिया गया। जबकि दानपत्र में सिर्फ 174 का एक भाग, जिसमें एक कमरा, एक रसोईघर और गलियारे के उपर बना एक कमरा शामिल है। दानपत्र से कई गुना ज्यादा जमीन का नामांतरण किया गया है। जिसका न तो दानपत्र में उल्लेख है और न ही वसीयत की चतुर सीमा में। वसीयत में फर्जी हस्ताक्षर है और माता-पिता की मृत्यु के बाद तैयार की गई है।नगर परिषद ने नामांतरण में कोई जांच पड़ताल नहीं कीशिकायतकर्ता ने बताया कि नगर परिषद के अधिकारियों की मिलीभगत साफ नजर आ रही है। कोई नामांतरण का प्रकरण आता है तो उसकी जांच पड़ताल की जाती है। लेकिन लतीका ओझा के नाम से दोनों भूखंड बिना जांच पड़ताल के नामांतरण कर दिए गए। वसीयत में जिस दानपत्र का उल्लेख किया गया है, दान में महज भूखंड क्रमांक 174 के हिस्से की कुछ जमीन ही दी गई थी, जबकि नामांतरण भूखंड क्रमांक 174 व 175 का कर दिया गया। नियम के अनुसार पैतृक संपत्ति की वसीयत नहीं हो सकती है। सिर्फ एकल स्वामित्व की वसीयत होती है, नियम के अनुसार एकल स्वामी में स्वर्गीय इंदुमति के पास एक कमरा, रसोईघर, एक गलियारे का कमरा है। जो उनकी सास स्वर्गीय मणीदेवी ओझा द्वारा दिनांक 14 जून 1984 को दान में दिया गया था। नप सीएमओ ने वसीयत में उल्लेखित चर्तुसीमा का भी भौतिक सत्यापन नहीं किया और न ही संपत्ति के पुराने रिकार्ड को देखा।

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