मुंबई: हिंदू पंचांग के नए संवत की शुरुआत और दीपावली के पावन अवसर पर शेयर बाजार में ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ की परंपरा निवेशकों के बीच बेहद उत्साह और उल्लास से जुड़ी होती है। यह महज एक घंटे का संक्षिप्त कारोबारी सत्र नहीं है, बल्कि नए हिंदू विक्रम संवत के आगमन पर शुभ शुरुआत और सुरक्षित निवेश करने का एक बेहतरीन अवसर माना जाता है। इस वर्ष 2026 में शेयर बाजार में मुहूर्त ट्रेडिंग के ऐतिहासिक अनुष्ठान के जरिए नए संवत 2083 का भव्य स्वागत किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस बार यह विशेष मुहूर्त सत्र शेयर बाजार में पिछले एक हफ्ते की जबरदस्त और ऐतिहासिक तेजी के ठीक बाद आयोजित हो रहा है, जहां पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 6,569 अंकों की भारी उछाल और निफ्टी में लगभग 9 प्रतिशत की शानदार मजबूती दर्ज की गई है। इस तूफानी तेजी के दम पर केवल सात दिनों के भीतर बीएसई (BSE) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 29 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 500 लाख करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े के पार पहुंच चुका है।
मुहूर्त ट्रेडिंग 2026 का पूरा शेड्यूल और समय, जानें किस समयावधि में निवेशक कर सकेंगे शेयरों की खरीद-फरोख्त
इस विशेष कारोबारी सत्र के दौरान निवेशक इक्विटी, डेरिवेटिव्स और अन्य उपलब्ध विभिन्न सेगमेंट में आसानी से अपने ट्रेड कर सकते हैं। चूंकि सामान्य कारोबारी दिवसों की तुलना में इस दिन का समय और इससे जुड़े नियम अलग होते हैं, इसलिए मुहूर्त ट्रेडिंग में उतरने से पहले इसके सटीक समय और तौर-तरीकों को समझ लेना हर निवेशक के लिए फायदेमंद रहता है। स्टॉक एक्सचेंजों (BSE और NSE) के आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार, आज यानी रविवार, 8 नवंबर 2026 को मुहूर्त ट्रेडिंग का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें निवेशकों को इक्विटी बाजार में कारोबार के लिए कुल एक घंटे का विशेष समय मिलेगा:
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प्री-ओपन सेशन: दोपहर 2:05 से 2:17 बजे तक
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सामान्य ट्रेडिंग सत्र: दोपहर 2:20 से 3:30 बजे तक
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क्लोजिंग ऑक्शन की शुरुआत: दोपहर 3:15 बजे
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क्लोजिंग प्रोसेस: दोपहर 3:35 बजे तक
इस निर्धारित समयावधि के दौरान निवेशक अपने संबंधित ब्रोकर के ट्रेडिंग एप्लीकेशन या प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने पसंद के शेयरों की खरीद और बिक्री के आर्डर आसानी से लगा सकते हैं।
क्या होती है मुहूर्त ट्रेडिंग और क्या है इसकी दशकों पुरानी परंपरा? जानिए इसका ऐतिहासिक महत्व
भारतीय शेयर बाजार में मुहूर्त ट्रेडिंग की यह परंपरा बहुत पुरानी और प्रतिष्ठित है। इस अनूठी प्रथा की शुरुआत बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में वर्ष 1957 में की गई थी, जिसके बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने भी वर्ष 1992 से इस परंपरा को पूरी भव्यता के साथ जारी रखा है। सनातन मान्यताओं के अनुसार, दीपावली के शुभ दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन करके किसी भी नए कार्य की शुरुआत करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इसी सांस्कृतिक परंपरा का पालन करते हुए निवेशक भी नए संवत के पहले दिन शेयर बाजार में प्रतीकात्मक और शुभ निवेश करते हैं। पुराने समय में इस खास मौके पर दलाल और ब्रोकर अपनी पारंपरिक अकाउंट बुक्स यानी बही-खातों की पूजा करते थे, जिसे ‘चोपड़ा पूजन’ के नाम से जाना जाता था। आज के आधुनिक दौर में भी अधिकांश निवेशक इस दिन अपनी पसंद के बेहतरीन शेयरों में निवेश करके नए वित्तीय वर्ष का शुभारंभ करते हैं।
मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान शेयरों की खरीदारी करते समय इन आसान और जरूरी बातों का रखें विशेष ध्यान
यदि आप इस बार पहली बार मुहूर्त ट्रेडिंग के इस पावन सत्र में हिस्सा लेने की सोच रहे हैं, तो इसके लिए आपको कोई नया या अलग डीमैट खाता खोलने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। आप अपने मौजूदा और सक्रिय ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए ही इस सत्र में आसानी से कारोबार कर सकते हैं। खरीदारी करते समय निम्नलिखित बिंदुओं का ध्यान रखना आवश्यक है:
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ब्रोकर ऐप पर लॉगिन: अपने मौजूदा ट्रेडिंग अकाउंट में लॉगिन करके पहले से उपलब्ध और अपनी पसंद की कंपनियों की लिस्ट तैयार रखें।
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मजबूत शेयरों का चुनाव: बिना सोचे-समझे किसी भी कंपनी के शेयर में पैसा झोंकने के बजाय उसके मजबूत बिजनेस मॉडल, वित्तीय सेहत और भविष्य की ग्रोथ को समझें।
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लिमिट ऑर्डर का प्रयोग: शेयरों की खरीद करते समय अपनी मनचाही कीमत पर ही सौदा पक्का करने के लिए मार्केट आर्डर की जगह ‘लिमिट ऑर्डर’ का इस्तेमाल करें।
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फंड का सही प्रबंधन: मुहूर्त ट्रेडिंग के उत्साह और जोश में आकर अपनी वित्तीय क्षमता से अधिक पूंजी निवेश करने से हमेशा बचें।
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लंबी अवधि का दृष्टिकोण: केवल एक दिन शुभ होने के कारण किसी भी कमजोर कंपनी के शेयर में पैसा लगाना सही रणनीति नहीं है; निवेश का आधार हमेशा कंपनी के फंडामेंटल होने चाहिए।
बाजार विशेषज्ञों की राय, जानिए एक्सपर्ट्स ने मुहूर्त ट्रेडिंग के लिए क्या दी है निवेश रणनीति
इस विशेष कारोबारी सत्र को लेकर बाजार के दिग्गज विशेषज्ञों ने अपनी बहुमूल्य राय साझा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार का समग्र परिप्रेक्ष्य फिलहाल सतर्कता के साथ सकारात्मक बना हुआ है, हालांकि हालिया बड़ी तेजी के बाद बीच-बीच में मुनाफावसूली और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए निवेशकों को इस मुहूर्त सत्र के दौरान केवल मजबूत फंडामेंटल, बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड और शानदार अर्निंग विजिबिलिटी वाली चुनिंदा कंपनियों पर ही अपना फोकस रखना चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि मुहूर्त ट्रेडिंग को अल्पकालिक सट्टेबाजी का जरिया बनाने के बजाय एक लंबी अवधि के सुनहरे निवेश के रूप में देखना ज्यादा समझदारी भरा कदम होगा। बाजार की शुरुआती तेजी को देखकर हड़बड़ी में खरीदारी करने से बचना चाहिए और चरणों में धीरे-धीरे निवेश करना चाहिए।
क्या मुहूर्त ट्रेडिंग में मुनाफा कमाने की होती है गारंटी? निवेशकों के लिए जरूरी सावधानियां
यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि मुहूर्त ट्रेडिंग को भले ही बाजार में एक शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इसका यह कतई अर्थ नहीं है कि इस दिन खरीदे गए हर शेयर से मुनाफा होना तय ही है। इस विशेष एक घंटे के सत्र में आमतौर पर सामान्य दिनों की तुलना में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम रहता है, जिसके कारण सीमित खरीद-बिक्री के बीच शेयरों के भाव में अचानक उतार-चढ़ाव आ सकता है। जानकारों का कहना है कि इस दिन बाजार में दिखने वाली तेजी को अगले नियमित कारोबारी सत्रों में भी लगातार तेजी बने रहने का अकाट्य संकेत नहीं मानना चाहिए। निवेशकों को चाहिए कि वे केवल दीवाली के जोश में आकर गलत फैसले न लें, बल्कि पूरी तरह कंपनी के वैल्युएशंस और फंडामेंटल्स की जांच परख करने के बाद ही संवत 2083 के लिए अपनी नई निवेश यात्रा की मजबूत शुरुआत करें।