रानी दुर्गावती महिला चिकित्सालय (एल्गिन) के स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट (SNCU) ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विजया जायसवाल और उनकी समर्पित टीम (सिस्टर हेमलता एवं सिस्टर नूतन) ने अत्यंत कम वजन और सांस की गंभीर तकलीफ से जूझ रहे एक समय-पूर्व जन्मे (प्रीमैच्योर) नवजात की जान आधुनिक ‘लिसा’ (LISA) तकनीक के माध्यम से सफलतापूर्वक बचा ली है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि नवजात शिशु को वेंटिलेटर की जटिलताओं में डाले बिना ही सर्फैक्टेंट दवा देकर उसे सुरक्षित नया जीवन प्रदान किया गया है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
🩺 क्या है आधुनिक ‘लिसा तकनीक’ और इसके क्या हैं बड़े फायदे?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ‘लिसा’ यानी लेस इनवेसिव सर्फेक्टेंट एडमिनिस्ट्रेशन (Less Invasive Surfactant Administration) नवजातों, विशेषकर प्रीमैच्योर बच्चों के लिए एक बेहद कम तकलीफदेह आधुनिक विधि है। समय से पहले जन्मे बच्चों के फेफड़ों में प्राकृतिक रूप से ‘सर्फैक्टेंट’ नामक रसायन की कमी होती है, जिससे उन्हें सांस लेने में भारी परेशानी होती है। पारंपरिक तरीकों में वेंटिलेटर ट्यूब के जरिए यह दवा दी जाती थी, लेकिन लिसा तकनीक में एक बहुत ही पतली और मुलायम कैथेटर के माध्यम से बच्चा जब खुद सांस ले रहा होता है, तभी सीधे फेफड़ों में दवा पहुंचा दी जाती है। इससे बच्चे को यांत्रिक वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ती, कोमल फेफड़े सुरक्षित रहते हैं, न्यूनतम दर्द होता है और बच्चा तेजी से रिकवर होकर जल्द स्वस्थ हो जाता है। इस बेहतरीन सफलता पर सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी, एल्गिन अधीक्षक डॉ. नीता पाराशर और SNCU इंचार्ज डॉ. पल्लवी लोंदे सहित तमाम वरिष्ठ चिकित्सकों ने पूरी टीम को बधाई दी है।