भोपाल। राजधानी भोपाल के वर्ष 2047 के प्रस्तावित मास्टर प्लान को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। किसानों का आरोप है कि भोजताल संरक्षण, रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट और ग्रीन बेल्ट जैसी श्रेणियों के नाम पर क्षेत्र के 66 गांवों की निजी कृषि भूमि को बीआईजेड-1 (BIZ-1) और बीआईजेड-2 (BIZ-2) यानी व्यावसायिक व औद्योगिक श्रेणियों में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इससे कई पीढ़ियों से खेती कर अपनी आजीविका चलाने वाले हजारों किसानों के सामने भूमिहीन होने और आर्थिक संकट का खतरा पैदा हो गया है। इसी विरोध के चलते किसानों ने नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) विभाग में सामूहिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
🚶 मुगालिया छाप से T&CP कार्यालय तक पदयात्रा: ग्राम सभाओं की बिना सहमति मास्टर प्लान थोपने का आरोप, 1800 से ज्यादा आपत्तियां आईं
किसान नेता अनोखी मानसिंह पटेल और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1995 के मास्टर प्लान और 2031 के ड्राफ्ट प्लान में इन जमीनों का लैंडयूज ‘कृषि’ ही दर्ज था। किसानों ने सवाल उठाया है कि पंचायती राज व्यवस्था में 66 ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं की लिखित सहमति के बिना गांवों के भविष्य का फैसला कैसे किया जा सकता है। विरोध दर्ज कराने के लिए किसान मुगालिया छाप से संयुक्त संचालक कार्यालय तक पैदल पदयात्रा निकाल रहे हैं। गौरतलब है कि भोपाल विकास योजना 2047 पर दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर है और अब तक 1800 से अधिक लिखित आपत्तियां विभाग के पास पहुंच चुकी हैं।