हवा में लगातार 12 घंटे उड़ने का बनाया रिकॉर्ड, भोपाल के युवाओं में कबूतर पालने का जुनून

भोपाल: राजधानी में कबूतर पालने का शौक तेजी से एक जुनून का रूप लेता जा रहा है. शहर के कई इलाकों में लोग खासतौर पर विदेशी नस्लों के कबूतर पाल रहे हैं. इन कबूतरों की खूबसूरती, उड़ान क्षमता और अनोखी नस्लें कबूतर प्रेमियों को आकर्षित कर रही हैं. कुछ शौकीन तो अपने कबूतरों को विशेष प्रशिक्षण देकर उड़ान प्रतियोगिताओं में उतारते हैं और रिकॉर्ड बनाने की कोशिश करते हैं.

पुराने शहर के शाहजहांनाबाद निवासी युवक हैदर ने अपने कबूतर को लगातार 12 घंटे तक उड़ाने का दावा किया, जिसे लेकर कबूतर प्रेमियों के बीच खासा उत्साह देखा गया. शहर में अलग-अलग जगहों पर कबूतरों की उड़ान स्पर्धाएं भी आयोजित होती हैं, जहां उनकी सहनशक्ति और दिशा नियंत्रण की क्षमता को परखा जाता है.

विदेशी नस्लों का बढ़ता क्रेज

भोपाल में कबूतर पालने वालों के बीच विदेशी नस्लों के कबूतरों को पालने का खास क्रेज है. इनमें हाई-फ्लायर, फैंसी और सजावटी नस्लों के कबूतर शामिल हैं, जो देखने में आकर्षक होने के साथ-साथ बेहतर उड़ान क्षमता के लिए जाने जाते हैं. शौकीन लोग इन कबूतरों की देखभाल पर काफी खर्च भी करते हैं. कबूतरबाज हैदर ने बताया, “उनके पास अलग अलग नस्लों के 250 कबूतर हैं. इनमें सऊदी अरब, दुबई, पाकिस्तान और बांग्लादेशी शामिल हैं. उनकी देखभाल भी विशेष रूप से की जाती है. सर्दी से बचाव के लिए गरम मसाला का उबला पानी, अजवाइन और विशेष प्रकार का हेल्दी दाना दिया जाता है.”

बचपन से लगा कबूतरबाजी की शौक

हैदर ने कहा, “साल 2010 से उन्होंने कबूतरबाजी का टूर्नामेंट भी शुरू किया था. यह टूर्नामेंट पहले भोपाल लेबल तक ही सीमित था. इसमें खासकर भोपाल और आसपास से लोग अपने कबूतर के साथ भाग लेते थे. अब इस टूर्नामेंट का आयोजन मध्य प्रदेश के कई शहरों में करवाया जा रहा है. उनका ये शौक बचपन से ही रहा है.”

शौक के साथ जुड़ी चुनौतियां

हालांकि, यह शौक जितना रोमांचक है, उतना ही जोखिम भरा भी माना जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार कबूतरों के पंखों और उनकी बीट से फंगस, बैक्टीरिया और कीड़े फैल सकते हैं. इससे दमा, एलर्जी, सांस की बीमारी और त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. जानकारों की मानें तो कबूतरों के दड़बे की नियमित सफाई, मल-मूत्र का सही निपटान और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है, ताकि बीमारियों का खतरा कम किया जा सके.

शौक नहीं जुनून है कबूतरबाजी

भोपाल में कबूतर पालना सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि कई लोगों के लिए जुनून बन चुका है. इस जुनून के साथ जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही जरूरी है. यदि स्वास्थ्य और स्वच्छता का ध्यान रखा जाए, तो यह शौक नुकसान के बजाय आनंद और पहचान का माध्यम बन सकता है.

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