दिल्ली प्रदूषण पर किरण बेदी का तंज! कहा- ‘NCR में कितने मंत्री बिना एयर प्यूरीफायर के हैं’, सियासी गलियारों में हड़कंप

दिल्ली में प्रदूषण को लेकर पूर्व आईपीएस ऑफिसर किरण बेदी ने कहा कि NCR में हमारे कितने माननीय मंत्री एयर प्यूरीफायर के साथ या बिना एयर प्यूरीफायर के काम कर रहे हैं? उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि उनमें से कितनों को सीने में जकड़न, खांसी, नाक बंद या बहने की समस्या है? हम उन सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं. लेकिन, क्या यह उनका कर्तव्य नहीं है कि वे खुद की रक्षा करने से पहले अपने लोगों की रक्षा करें?

उन्होंने कहा कि अधिकारी प्यूरीफायर वाले ऑफिस में काम कर रहे हैं, प्यूरीफायर वाली कार में चल रहे हैं और प्यूरीफायर वाले घर में रह रहे हैं, उन्हें बाहर की हवा की क्वालिटी कैसे पता चलेगी? और सब कुछ सरकारी खर्चे पर? जबकि कई लोग सीने में जकड़न, नाक बहने, छींकने और खांसी से परेशान हैं और उन्हें बुखार भी है. उन्होंने कहा कि एनर्जी कम महसूस हो रही है. सभी को हेल्दी हवा चाहिए. यह एक अधिकार है.

पीएम मोदी से भी की थी अपील

वाइट पेपर में यह दर्ज होना चाहिए कि मौजूदा संकट का कारण क्या है? कौन और क्या हमें इस स्थिति तक लेकर आया?पूर्व आईपीएस ने पीएम मोदी से अपील की और कहा कि हर महीने दिल्ली और उसके आसपास वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों व मुख्य सचिवों के साथ वर्चुअल बैठक करें. उन्होंने कहा अगर यह आपकी निगरानी में होगा तो लोगों को भरोसा मिलेगा कि समस्या हल की जा रही है.

पूर्व IPS अधिकारी ने शनिवार को कहा था कि दिल्ली के प्रदूषण संकट से निपटने के तरीके की तीखी आलोचना की और सरकारी अधिकारियों से ‘सैनिटाइज्ड’ मीटिंग रूम से बाहर निकलकर स्मॉग से भरी सड़कों पर आने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा कि अगर हर एजेंसी लीडरशिप, विज़िबिलिटी, कंसिस्टेंसी और कोऑर्डिनेशन के साथ अपना रोल निभाए, तो NCR के एयर पॉल्यूशन को असरदार तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है.

‘गवर्नेंस में सही तालमेल न होने का नतीजा है’

पूर्व आईपीएस ने कहा कि देश का एयर-पॉल्यूशन संकट आज का कोई हादसा नहीं है. यह दशकों से गवर्नेंस में सही तालमेल न होने का नतीजा है. उन्होंने कहा कि अब हमें मिलकर काम करने वाले एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ पूरी तरह से बदलाव की ज़रूरत है. एक-दूसरे पर इल्ज़ाम लगाने के बजाय, सोच-समझकर हल निकालने की तरफ काम करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि बार-बार ऑफिस में बैठकर फैसले लेने के बजाय फील्ड में मौजूदगी पर ज़ोर दिया गया है. सबसे अच्छा सेंसिटाइज़ेशन है रोज बाहर आना, फील्ड में, खुले आसमान के नीचे और हवा में सांस लेना, सबसे ज़रूरी नियम है. उन्होंने कहा सैनिटाइज़्ड बाड़ों से बाहर आना और सड़कों पर चलना जरूरी है.

मालवा अभीतक की ताजा खबर सीधे पाने के लिए : 
ताज़ा ख़बर पाने के लिए एंड्राइड एप्लीकेशन इनस्टॉल करें :

यूनियन कार्बाइड की खंडहर दीवारों में अब गूंजेगी न्याय की कहानी! भोपाल गैस मेमोरियल बनाने पर लगी मुहर, सरकार ने हाई कोर्ट में बताया पूरा प्लान     |     भोपाल के कोलार में ‘गैस माफिया’ पर शिकंजा! 25 अवैध सिलेंडर जब्त, ब्लैक में बेचने की थी बड़ी तैयारी; प्रशासन की रेड से मचा हड़कंप     |     Ladli Behna Yojana Update: मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से ट्रांसफर किए 1836 करोड़ रुपये, जानें अगली किस्त और राहुल गांधी पर CM के तीखे प्रहार     |     अध्यात्म का महामिलन! बागेश्वर धाम पहुंचे सद्गुरु, धीरेंद्र शास्त्री से की खास मुलाकात; साथ आए 40 देशों के मेहमान भी हुए बाबा के मुरीद     |     भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ‘गैंगवार’! घायल के पीछे इमरजेंसी गेट तक पहुंचे हमलावर, सरेआम गोलियां चलने से अस्पताल में मची भगदड़     |     शहडोल के लिए ऐतिहासिक दिन! मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ अपना ब्लड सेंटर, अब MBBS की सीटें भी होंगी डबल; जानें आम जनता को क्या होगा फायदा     |     इंदौर में ‘महामुकाबला’! नेहरू स्टेडियम में चौकों-छक्कों की बारिश, संतों के आशीर्वाद और द ग्रेट खली की दहाड़ के बीच क्रिकेट का रोमांच     |     Shivpuri Fire News: शिवपुरी में दुकान और गोदाम में लगी आग, फंसे हुए परिवार ने साड़ी के सहारे उतरकर बचाई जान; लाखों का माल खाक     |     Jabalpur Police Action: जबलपुर एसपी ने 26 टीआई (TI) को दी एक साथ सजा, जानें पुलिस प्रभारियों पर क्यों गिरी गाज और क्या है पूरा मामला?     |     “नाम बदला, मजहब बदला पर किस्मत नहीं”—11 साल बाद MP पुलिस की गिरफ्त में आया मोस्ट वांटेड! भगोड़े के नए ठिकाने का ऐसे चला पता     |