चोरी की 73 सागौन की लकड़ियां थाने के मालखाने से गायब, कोर्ट ने दिए जांच के आदेश; 5 साल पहले पकड़ी थीं
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के धारियावाद के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सरफराज नवाज ने 2020 में सागौन की लकड़ियों की चोरी के मामले में एक आरोपी को सबूतों के अभाव और पुलिस द्वारा गंभीर प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए बरी कर दिया. अदालत ने मामले में सागौन की लकड़ियों की हेराफेरी में शामिल पाए गए कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच और संभावित आपराधिक कार्रवाई का भी आदेश दिया.
5 साल पहले दर्ज हुआ था मामला
आरोपी प्रकाश के बचाव पक्ष के वकील सैयद मोहम्मद इरफान ने कोर्ट में कहा, “यह मामला 16 अगस्त 2020 को शुरू हुआ, जब धारियावाड़ पुलिस स्टेशन में तैनात तत्कालीन एएसआई कंवरलाल ने 73 सागौन की लकड़ियों से लदे एक ट्रैक्टर की जब्ती का दावा करते हुए एक रिपोर्ट दर्ज कराई. यह जब्ती कथित तौर पर गांधीनगर, धारियावाद में एक सार्वजनिक सड़क पर की गई थी और आरोपी प्रकाश को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया था. बाद में, एक प्राथमिकी दर्ज की गई और जब्त की गई वस्तुओं, विशेष रूप से लकड़ी के टुकड़ों को पुलिस स्टेशन के गोदाम में जमा कर दिया गया.
73 सागौन की लकड़ियों का रिकॉर्ड नहीं
“हमने अदालत में कहा कि हालांकि जिस ट्रैक्टर और ट्रॉली में लकड़ी कथित तौर पर ले जाई गई थी, उसे जब्त कर लिया गया था और पुलिस स्टेशन के गोदाम में दर्ज किया गया था, लेकिन 73 सागौन की लकड़ियों का कोई रिकॉर्ड नहीं था. साथ ही, वर्तमान स्टेशन हाउस ऑफिसर द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट ने पुष्टि की कि सागौन की लकड़ियों को न तो रजिस्टर में दर्ज किया गया था और न ही वे गोदाम में भौतिक रूप से मौजूद पाए गए थे.
स्टोर प्रभारी ने कर दिया इनकार
इरफान ने आगे कहा, “इसके अलावा, अभियोजन पक्ष कोई स्वतंत्र गवाह, वन विभाग का कोई विशेषज्ञ या जब्त की गई लकड़ियों का कोई फोटोग्राफिक साक्ष्य पेश करने में विफल रहा. मुकदमे के दौरान विरोधाभासी गवाही सामने आई, क्योंकि एएसआई कंवरलाल ने दावा किया कि लकड़ियां जमा कर दी गई थीं, लेकिन स्टोर प्रभारी शंकरलाल ने ऐसी किसी भी जमा राशि से इनकार किया.
पीठासीन अधिकारी सरफराज नवाज की अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए कहा कि या तो यह मामला आरोपी को झूठा फंसाने के लिए पूरी तरह से गढ़ा गया था या जब्त की गई लकड़ियों का जब्ती और भंडारण के बीच पुलिस अधिकारियों द्वारा गबन किया गया था. दोनों ही मामलों में अदालत ने सत्ता के गंभीर दुरुपयोग का उल्लेख किया.
उदयपुर रेंज के आईजी को जांच के आदेश
वहीं उदयपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक को एएसआई कंवरलाल, आईओ छविलाल और स्टोर प्रभारी शंकरलाल की भूमिका की विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया. अदालत ने अपने आदेश में कहा, “जांच में गबन साबित होने पर आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए. उदयपुर रेंज के आईजी को 18 नवंबर 2025 तक की गई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया गया है. अदालत ने कहा कि जो भी फैसला लिया जाए, उसकी प्रति डीजीपी और एडीजी विजिलेंस को भी भेजी जाए.