शाजापुर
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कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना के निर्देशन में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए आज कालापीपल जनपद पंचायत क्षेत्र की आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को शासकीय महाविद्यालय कालापीपल के सभागार में उनमुखीकरण प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में विषय विशेषज्ञों/चिकित्सकों द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, बाल मृत्यु दर कम करने के उपाय बताए गए।
प्रशिक्षण में अनुविभागीय अधिकारी शुजालपुर श्रीमती अर्चना कुमारी ने कहा कि जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार के महाअभियान में सभी आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि वे नियमित रूप से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर निगरानी रखें। प्रसव पूर्व व पश्चात समय – समय पर बच्चों के स्वास्थ लाभ की जानकारी लें, जिससे बाल- मृत्यु दर को कम किया जा सके।
प्रशिक्षण में डॉ. रीना विश्वकर्मा ने मातृ स्वास्थ्य, प्रथम त्रिमास में पंजीकरण, प्रसव पूर्व जांचे, गर्भवती टीकाकरण फोलिक एसिड, आयरन अनुपूरण, एलबेन्डाजाल एवं केल्शियम प्रदायगी के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इसी तरह श्री दीपेश भावसार ने किशोरी स्वास्थ्य, मासिक धर्म के दौरान व्यक्तिगत साफ-सफाई, संतुलित भोजन एवं पूरक आहार, आयरन अनुपूरण, सुरक्षित संस्थागत प्रसव, नि:शुल्क परिवहन जांचे, दवाईयां एवं भोजन, जननी सुरक्षा एवं प्रसूति सहायता योजना, डॉ. दीपक परमार ने टीकाकरण एवं शिशु स्वास्थ्य, डॉ. विजय राठौर ने एच.बी.वाय.सी., बीएमओ डॉ. यशवंत परमार ने बाल मृत्यु की रोकथाम, डॉ. कीर्ति शर्मा एवं डॉ. अशरफ ने आरबीएसके 4-डी के बारे में विस्तार से बताया।
विशेषज्ञों/चिकित्सकों ने बताया कि उच्च शिशु मृत्यु- दर मध्यप्रदेश में विकास और प्रगति के रास्ते में एक रुकावट ही नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी चुनौती भी है। वर्तमान समय में शिशु मृत्यु-दर पर नियंत्रण हमारी स्वास्थ्य सेवाओं की पहली प्राथमिकता है।
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शिशु मृत्यु -दर कम करने के लिए कुछ ज़रूरी कदम उठाना आवश्यक
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सुरक्षित गर्भावस्था के बारे में बताया गया कि गर्भावस्था के दौरान मां जितनी स्वस्थ, सुरक्षित और मजबूत होगी, बच्चा भी उतना ही स्वस्थ होगा। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में होने वाली रक्ताल्पता या एनीमिया मातृ एवं शिशु मृत्यु-दर का एक बहुत बड़ा कारण है। अतः एनीमिया की रोकथाम और उपचार के लिए आयरन फोलिक एसिड टेबलेट, आयरन इनफ्यूजन तथा ब्लड ट्रांसफ्यूजन जैसी सेवाएं जीवन रक्षक प्रणाली की तरह कार्य करती हैं। सुरक्षित प्रसव अंतर्गत शिशु मृत्यु-दर का एक बहुत बड़ा कारण प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताएं हैं। अतः सुरक्षित प्रसव सेवाओं के माध्यम से इन जटिलताओं पर नियंत्रण कर, शिशु मृत्यु-दर को भी नियंत्रित किया जा सकता है। सुरक्षित प्रसव एवं उपरांत सेवाओं के संबंध में बताया गया कि प्रसव-उपरांत प्रदान की जाने वाली मातृ एवं शिशु सेवाएं जैसे टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण, रोगों का समय से उपचार आदि शिशु मृत्यु-दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार एवं पोषण एवं स्वच्छ वातावरण भी शिशु मृत्यु-दर कम करने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकते हैं। क्यों कि इन से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाओं अंतर्गत कार्यरत एसएनसीयू, एनबीएसयू, पीआईसीयू तथा एनआरसी कमजोर और बीमार बच्चों के स्वास्थ्य की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही मैटरनिटी सेवाएं सुरक्षित प्रसव के माध्यम से शिशु को एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य प्रदान करने में सक्षम साबित हो रही हैं।
इस अवसर पर जिला टीकाकरण अधिकारी श्री भूदेव मेहता, बीएमओ कालापीपल डॉ. परमार, परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास, सुपरवाईजर, आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, चिकित्सक आदि उपस्थित थे।
Department Of Women Child Development, Madhya Pradesh
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