रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और PM मोदी के बीच फोन पर हुई बात, दोनों नेताओं ने इन मुद्दों पर की चर्चा
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को फोन पर ‘‘सार्थक” बातचीत की तथा द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन संघर्ष पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं के बीच टेलीफोन पर बातचीत शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के डिजिटल शिखर सम्मेलन से कुछ दिन पहले हुई, जिसकी मेजबानी चार जुलाई को भारत द्वारा की जाएगी।
रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने कहा, ‘‘बातचीत का स्वरूप सार्थक एवं रचनात्मक रहा। नेताओं ने रूस और भारत के बीच विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए आपसी प्रतिबद्धता दोहराई और संपर्क जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।” इसने कहा कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने मोदी को कूटनीति के माध्यम से संघर्ष को सुलझाने से यूक्रेन के स्पष्ट इनकार के बारे में सूचित किया।
बयान में कहा गया, ‘‘दोनों नेताओं ने यूक्रेन से संबंधित स्थिति पर चर्चा की। रूसी राष्ट्रपति ने विशेष सैन्य अभियान क्षेत्र में वर्तमान स्थिति का जिक्र किया, जो संघर्ष को हल करने के लिए राजनीतिक और राजनयिक कदम उठाने से कीव के स्पष्ट इनकार की ओर इशारा करता है।”
भारत ने अभी तक यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की निंदा नहीं की है और वह कहता रहा है कि संकट को कूटनीति एवं बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और जी20 के भीतर अपने देशों के सहयोग पर भी चर्चा की।
बयान में कहा गया, “शंघाई सहयोग संगठन और जी20-जिसकी अध्यक्षता भारत के पास है, के साथ-साथ ब्रिक्स प्रारूप के भीतर सहयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।” क्रेमलिन के बयान में यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले हफ्ते वैगनर समूह द्वारा कुछ समय के लिए किए गए सशस्त्र विद्रोह के संबंध में रूसी नेतृत्व द्वारा उठाए गए कदमों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। इसमें कहा गया, “24 जून के घटनाक्रम के संबंध में, नरेन्द्र मोदी ने कानून और व्यवस्था की रक्षा करने तथा देश में स्थिरता और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूसी अधिकारियों की ठोस कार्रवाई के प्रति समर्थन व्यक्त किया।”
येवगेनी प्रिगोझिन और उनके वैगनर समूह द्वारा शनिवार को किया गया विद्रोह राष्ट्रपति पुतिन के लिए उनके दो दशकों से अधिक के शासन में सबसे गंभीर चुनौती बन सकता था। इस घटनाक्रम से पुतिन के नेतृत्व पर भी सवाल खड़े हो गए। वैगनर समूह ने रोस्तोव-ऑन-डॉन शहर पर कब्ज़ा कर लिया था। विद्रोह तब समाप्त हुआ जब प्रिगोझिन ने मॉस्को की तरफ बढ़ रहे अपने सैनिकों को वापस लौटने का आदेश दिया।
इससे पहले गुरुवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस तरह की तमाम खबरों को विराम लगाते हुए पीएम नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। एक समारोह के दौरान उन्होंने अपने देश के व्यापारियों को भारत से सीख लेने की नसीहत देते हुए कहा कि मेरा दोस्त नरेंद्र मोदी भारत में शानदार काम कर रहा है। हमें भी ठीक उसी तर्ज पर रूस में काम करने की जरूरत है।
पुतिन ने पीएम मोदी और भारत पर क्या कहा
पुतिन ने कहा कि भारत में हमारे दोस्त प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ साल पहले एक कॉन्सेप्ट लेकर आए। उन्होंने मेक इन इंडिया को पेश किया। और आप जानते हैं कि मेड इन इंडिया का भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वास्तव में बहुत लाभकारी साबित हुई। पुतिन ने कहा कि जो आविष्कार किया गया है उसकी कॉपी करने में कोई पाप नहीं है, चाहे वह हमने नहीं, बल्कि हमारे दोस्तों ने किया हो। यह बहुत अच्छी तरह से काम करता है।
रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के असर को किया खारिज
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि विदेशी कंपनियों के बाहर निकलने और पश्चिमी प्रतिबंध लगाने के बाद रूसी बाजार में गिरावट नहीं हुई। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों के कारण विपरीत प्रभाव पड़ा पुतिन ने कहा कि जैसा कि मैंने पहले ही कहा है, और एक से अधिक बार कहा है, प्रतिबंधों के कारण या पश्चिमी कंपनियों के अस्तित्व के कारण, दुनिया ढह नहीं गई। इसके अलावा, रूसी उद्यमियों के लिए अवसर कई गुना बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि रूस को घरेलू ब्रांडों को बढ़ावा देने के लिए एक नई नीति की जरूरत है।