अवैध कब्जों पर अब कलेक्टर भी परेशान, नाराज होकर बोले- रोक क्यों नहीं पा रहे

रायपुर: पिछले छह महीने में 700 खसरा नंबरों की 47 एकड़ जमीन की खरीदी-बिक्री पर बैन लगा दिया गया है।पिछले छह महीने में 700 खसरा नंबरों की 47 एकड़ जमीन की खरीदी-बिक्री पर बैन लगा दिया गया है। इसके बावजूद शहर में अवैध कब्जों की शिकायतें कम होने के बजाय बढ़ रही हैं। कलेक्टोरेट में पिछले पांच जनदर्शन में 100 से ज्यादा शिकायतें मिलीं, इसमें करीब 40 शिकायतें जमीन संबंधित ही रहीं।किसी की जमीन पर अवैध कब्जा तो किसी मोहल्ले में, इतना ही नहीं, सरकारी जमीनों पर भी अवैध कब्जों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। कलेक्टर इस मामले में कई बार राजस्व अफसरों को फटकार भी लगा चुके हैं। इसके बाद भी अवैध कब्जों की शिकायतें कम नहीं हो रही हैं। अवैध कब्जों से कलेक्टर बेहद नाराज हैं। इसलिए सभी तहसीलों में एसडीएम के नेतृत्व में टीम बनाई गई। इसमें सभी विभागों के अफसरों को शामिल किया गया।लगातार जमीनों की जांच की गई। इसके बाद ही रायपुर की 47 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई। जिले में अब तक 700 खसरा नंबरों में दर्ज कुल 140,2143 हेक्टेयर जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लगाई जा चुकी है। इन सभी खसरा नंबरों की ऑनलाइन इंट्री भी कर ली गई है। यानी ऑनलाइन खसरा नंबर आते ही इन जमीनों की रजिस्ट्री भी नहीं हो पाएगी। लगातार कार्रवाई के बाद भी अवैध कब्जे नहीं रुक रहे हैं। भू माफिया ले-आउट और डायवर्सन के बगैर धड़ल्ले से अवैध प्लॉटिंग कर रहे हैं। सबसे ज्यादा अवैध प्लाटिंग आउटर में हो रही है।पहले भी 56 लोगों पर एफआईआर दर्जपिछले साल अवैध कब्जों पर बड़ी कार्रवाई की गई थी। तहसील से मिली जांच रिपोर्ट के आधार पर 56 लोगों पर अलग-अलग थानों में निगम अफसरों ने एफआईआर भी दर्ज कराई थी। इसके बाद भी सबसे ज्यादा अवैध कब्जे निगम के 10 जोन क्षेत्रों में ही हुए। दरअसल इन सभी एफआईआर में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने की वजह से मामला पुलिस केस डायरी में ही उलझ कर रह गया। इससे अवैध कब्जा करने वालों के हौसले बुलंद हुए। राजनैतिक संरक्षण में इनसे जुड़े लोगों ने अवैध कब्जा करने का सिलसिला जारी रखा।कार्रवाई पर भी सवालअवैध कब्जा करने वालों पर निगम की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि अधिकतर जगहों पर निगम अफसरों ने कार्रवाई के नाम पर सांकेतिक तौर पर बाउंड्रीवॉल खुरची या मुरुम की सड़क को उखाड़ दिया। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कई पॉश इलाकों में अभी भी भूमाफियाओं का जमीन पर अवैध कब्जा साबित है।यहां ज्यादा एफआईआरनिगम ने सबसे ज्यादा 9 एफआईआर पुरानीबस्ती थाने में दर्ज करवाई थी। डीडीनगर थाने में 5, गुढ़ियारी में 3 तथा आमानाका, कबीरनगर, मोवा, मुजगहन समेत कुछ थानों में एफआईआर दर्ज हैं। निगम की सूची के अनुसार दलदल सिवनी में 31 लोगों ने, भाठागांव में 34, मठपुरैना में 49, डूंडा में 43 और बोरियाखुर्द में 33 लोगों ने अवैध कब्जा किया है।तहसील से जो जांच रिपोर्ट मिली थी उसके आधार पर अटारी, हीरापुर-जरवाय, सोनडोंगरी, गोंदवारा, खमतराई, भनपुरी, दलदल सिवनी, आमासिवनी, कचना, गुढ़ियारी, गोगांव, कोटा, चिरहुलडीह, डूमरतालाब, रायपुरा, डंगनिया, चंगोराभाटा, भाठागांव, मठपुरैना, जोरा, बोरियाखुर्द, डूंडा, देवपुरी में सबसे ज्यादा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे हुए हैं।जनदर्शन में फिर पहुंची जमीन की शिकायतेंकलेक्टोरेट में सोमवार को आयोजित जनदर्शन में शहर में हो रहे अवैध कब्जों की शिकायतें पहुंचने से कलेक्टर नाराज हो गए हैं। उन्होंने राजस्व अफसरों से पूछा है कि अवैध कब्जों पर कार्रवाई कम या धीमी क्यों हो रही है। जनदर्शन की शुरुआत में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद वार्ड के पूर्व पार्षद गोविंद मिश्रा ने कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे को बताया कि अमलीडीह तालाब पर लगातार कब्जे हो रहे हैं।अफसरों को बताने पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है। अकोली के सुरेश दीवान ने कहा कि औद्योगिक केंद्र विकास निगम सिलतरा की ओर से खाली जमीन को अधिग्रहित की जा रही है। इस अधिग्रहण को आम लोगों के हित में रद्द करना चाहिए। खरोरा के योगेश चंद्राकर ने निजी जमीन पर से अवैध कब्जा हटाने की मांग की। वर्जन…शहर में इन इलाकों के खसरा नंबरों पर प्रतिबंधगुढियारी 04गोंदवारा 03सोनडोंगरी17गोगांव 28उरकुरा 23कचना 02अवैध कब्जों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। पहले शिकायतें ज्यादा थी, अब कम हुई हैं। जांच में अवैध कब्जा पाए जाने पर रजिस्ट्री में ही बैन लगा दिया जा रहा है। तहसीलवार अवैध कब्जों की जानकारी ली जा रही है। सुस्त अफसरों को नोटिस भी दे रहे हैं। -डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, कलेक्टर

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