नोएडा: औद्योगिक व आईटी नगरी के बाद अब नोएडा सिटी ऑफ वैट लेंड के रूप में जानी जाएगी। यहां 1 लाख 28 हजार वर्गमीटर से ज्यादा के क्षेत्रफल में वेट लैंड बनाने का काम पूरा किया जा चुका है। ये वे वेट लैंड हैं, जिन्हें कृत्रिम रूप से बनाया गया है। इसके अलावा नाले में इन सीटू कंस्ट्रेक्टेड तकनीक से तीन वेट लैंड बनाए गए है। ये वेट लैंड जल संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ जलीय पौधों और जीवों को संरक्षण भी दे रहे है।वेटलैंड का जाएजा लेते प्राधिकरण ओएसडी इंदू प्रकाश सिंह।डंपिंग ग्राउंड को वेट लैंड में किया तब्दीलसेक्टर-54 वेट लैंड इसे नोएडा का डंपिंग ग्राउंड कहा जाता था। यहां रेमिडेशन तकनीक से लाखों टन कूड़े का निस्तारण किया गया। इससे आरडीएफ बनाई गई। इसके बाद इसे वेट लैंड के रूप में बदला गया। करीब 17 एकड़ में इसका विस्तार किया गया। यहां लोगों के टहलने के लिए एलिवेटड ट्रैक भी बनाया गया। परियोजना पर 4.86 करोड़ रुपए खर्च किए गए।ये वेटलैंड का लाइट व्यू है।दो एरिया को जोड़कर बनाया वेट लैंडसेक्टर-91 को कृतिम वेट लैंड के रूप में परिवर्तित किया गया। यह जमीन वेस्ट और खरपतवार से भरी हुई थी। यहां 60 हजार वर्गमीटर में 5.12 करोड़ रुपए की लागत से वेट लैंड का निर्माण किया गया। इसमें दो एरिया को जोड़ते हुए एक पुल का निर्माण किया और बीच में वाटर बॉडी रखा गया है।सेक्टर-54 में बने वेटलैड में बच्चों के लिए लगाए गए झूले।शहर के मुख्य नाले में बनाया वेट लैंडनोएडा में मुख्य नाले को साफ करने के लिए सेक्टर-50 में इन सीटू कंसट्रेक्टेड तकनीक से वेट लैंड तैयार किया गया है। जिसमें से सीवरेज पानी स्वतः की छनकर साफ हो जाता है। यही पानी आगे यमुना नदी में गिरता है। इसका 100 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसे 7 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है।शहर के मुख्य नाले में बनाए गए इन सिटू वेट लैंडइसी तकनीक से ही सेक्टर-135 और एनएसईजेड डाउन स्ट्रीम में दो वेट लैंड बनाए जा रहे है। इनको बनाने में करीब 14 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे है। इसमें एनएसईजेड का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और सेक्टर-135 का 35 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
मालवा अभीतक की ताजा खबर सीधे पाने के लिए :
ताज़ा ख़बर पाने के लिए एंड्राइड एप्लीकेशन इनस्टॉल करें :