बलिया: बलिया में सूर्य उपासना के साथ आज यानी शुक्रवार से छठ महापर्व की शुरुआत हो गई। छठ पूजा के गैर प्रांत रहने वाले लोग परिवार के साथ पहुंचने लगे हैं। चार दिनों तक चलने वाले इस पूजा के पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य के बाद समापन होता है।इस पावन पूजा के लिए नदी घाटों पर छठ घाट की तैयारी भी युद्ध स्तर पर होने लगी है। शहर के रामलीला मैदान, टाउनहॉल, आवास विकास कालोनी, भृगु मंदिर सहित 18 स्थानों पर पूजा घाट बनाए जा रहे है। ग्रामीण क्षेत्रों में नदी व तालाब किनारे छठ पूजा होगी। सुबह शाम घाटों की साफ-सफाई जोरों से हो रही है।छठ महापर्व की तैयारी में जुटे लोग।संतान प्राप्ति व सुख-समृद्धि होती कामनाछठ महापर्व सूर्य उपासना का सबसे बड़ा त्योहार होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल पष्ठी तिथि पर छठ पूजा मनाई जाती है। इस पर्व में भगवान सूर्य के साथ छठी माई की भी पूजा-उपासना विधि-विधान के साथ की जाती है। छठी माई को सूर्यदेव की बहन है। धार्मिक मान्यता के अनुसार छठ का त्योहार व्रत संतान प्राप्ति करने की कामना, कुशलता, सुख-समृद्धि और उसकी दीर्घायु की कामना के लिए किया जाता है।चतुर्थी तिथि पर नहाय-खाय से इस पर्व की शुरुआत हो जाती है और षष्ठी तिथि को छठ व्रत की पूजा, व्रत और डूबते हुए सूरज को अर्घ्य के बाद अगले दिन सप्तमी को उगते सूर्य को जल देकर प्रणाम करने के बाद व्रत का समापन किया जाता है।छठ महापर्व के लिए सजे बाजार।नहाए-खाय से छठ महापर्व प्रारंभछठ महापर्व की शुरुआत नहाए-खाए के साथ आरंभ हो जाता है। यह व्रत बहुत ही कठिन माना जाता है। इसमें व्रती महिलाएं लगातार 36 घंटे निर्जला व्रत रखती हैं। सूर्य देव की उपासना और छठ मैया की पूजा करते संतान की प्राप्ति और उसकी लंबी आयु की कामना करती हैं। नहाए-खाए के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके नए और साफ-सुथरे पहनकर शाकाहारी भोजन किया जाता है।