दो साल से बंद उद्योग आधी जमीन बेच सकेंगे, पर इसमें औद्योगिक इकाई लगे; सरकार ने छोटे उद्योगों को दी राहत

भोपाल: कैबिनेट… सरकार ने छोटे उद्योगों को दी राहत, एमएसएमई की नई नीति।राज्य सरकार ने छोटे उद्योगों को राहत दी है। नई व्यवस्था के तहत बंद औद्योगिक इकाइयां जिनमें कम से कम 5 साल साल तक उत्पादन रहा हो और 2 साल से बंद पड़ी हों। ऐसी औद्योगिक इकाइयां अपने रिवाइवल के लिए आधी जमीन बेंच सकेंगी। लेकिन शर्त यह रहेगी कि यह जमीन सिर्फ औद्योगिक उद्देश्य के लिए बेची जा सकेंगी। इसके पीछे सरकार की मंशा बंद पड़े उद्योगों को राहत देने की है।अभी इन जमीनों को बेचे जाने की अनुमति नहीं है। इसमें शर्त यह भी रहेगी जमीन कमर्शियल और रेसीडेंसल के उपयोग के लिए नहीं दी जाएगी। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में एमएसएमई डिपार्टमेंट की नई नीति औद्योगिक भूमि, भवन ‌आवंटन एवं प्रबंधन नियम 2021 में संशोधन को मंजूरी दे दी।बैठक में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगों की जमीन पर वेयर हाउस खोलने को मंजूरी देेने का सुझाव दिया। इस पर एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा ने कहा कि उद्योग की जमीन वेयर हाउस खोलने के लिए दी जाती है तो उससे नीति के तहत प्रावधानों का उल्लंघन होगा। इसलिए ऐसी जमीनों को आईटी इंडस्ट्री को दिया जा सकता है। इसे कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी।एमएसएमई डिपार्टमेंट (सूक्ष्म लघु और उद्यम विभाग) समस्त विकसित एवं विकसित किए जाने वाले उद्योगों को पहले आओ-पहले पाओ की प्रक्रिया में सिर्फ इलेक्ट्रानिक पोर्टल से आन लाइन दी जाएगी।चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा- गोविंदपुरा में एमएसएमई की जमीनों पर वेयर हाउस खोलने की दी जाए अनुमतिकैबिनेट के अन्य प्रमुख बिंदुप्रदेश में ऐसी उचित मूल्य की दुकानें जहां सेल्समेन नहीं है और पात्र स्व-सहायता समूह के द्वारा दुकान संचालन करने की सहमति दी गई है, उन समूहों को ऐसी दुकानें आपसी सहमति से हस्तांरित करने की अनुमति। दुकान हस्तांतरण के लिए प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित होगी।कृषि संबंधी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कृषि अभियांत्रिक संचालनालय का विस्तार किया जाएगा। 163 नए पद सृजित कर 20 जिलों में जिला कार्यालय तथा दो संभागों में नए संभागीय कार्यालय स्थापित किए जाएंगे।कैबिनेट ने ओंकारेश्वर में आचार्य शंकक की 108 फुट ऊंची बहुधातु प्रतिमा और पेडेस्टल के निर्माण के लिए पुनरीक्षित लागत 198 करोड़ 25 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी।पिछडे़ वर्ग के युवाओं को जापान भेजे जाने का प्रस्ताव डेफरपिछड़े वर्ग के युवाओं को जापान भेजे जाने का प्रस्ताव डेफर हो गया। प्रस्ताव के अनुसार ड्राइवर और मेकेनिक के लिए 200 युवाओं को जापान में नौकरी देने की बात कही गई थी, जिस पर मंत्रियों की आपत्ति थी। एमएसएमई मंत्री सकलेचा ने कहा कि ड्राइवर और मैकेनिक बनाने और नौकरी के लिए उन्हें जापान क्यों भेजा जाए, यदि भेजना है तो इन संवर्गों के अलावा अपर क्लास का भी प्रावधान हो।जिस उद्देश्य से युवाओं को जापान भेजे जाने की बात कही जा रही है, उसके अच्छी ट्रेनिंग हम अपने यहां देकर उन्हें रोजगार दे सकते हैं। ड्राइवर और मैकेनिक के लिए युवा जापान जाएंगे तो वहां कंपनियां उनसे पांच साल का बांड भरवा लेंगी, जिससे वे कंपनियों की शर्त में बंध जाएंगे।इसमें बंधन इस बात का हटाना चाहिए। वह जब वापस आना चाहें तो आ जाएं, हम उन्हें रोजगार देंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस प्रस्ताव को उच्च स्तर पर चर्चा के बाद लाए जाने की बात कहते हुए मामले को वापस विभाग को भेज दिया।

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