मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल जिला मजिस्ट्रेट द्वारा खेल श्रेणी के हथियार लाइसेंस को रद्द करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया है। उच्च न्यायालय ने पाया कि लाइसेंस की श्रेणी बदलने के संबंध में पूर्व में पारित आदेश को विधिवत निरस्त किए बिना ही लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। हालांकि, कोर्ट ने श्रेणी परिवर्तन को पूर्णतः वैध घोषित नहीं किया है, लेकिन प्रक्रियागत चूक के कारण जिला प्रशासन के इस निर्णय को कायम रखने से इनकार कर दिया।
🎯 खिलाड़ी मोहन की याचिका पर सुनवाई: पहले आदेश को बिना वापस लिए की गई थी रद्द करने की कार्रवाई
मामले के अनुसार, तीन सदस्यीय समिति की पहली रिपोर्ट के आधार पर 18 मार्च 2026 को याचिकाकर्ता खिलाड़ी मोहन के लाइसेंस की श्रेणी बदलने का आदेश जारी किया गया था। इसके बाद दूसरी रिपोर्ट के आधार पर 2 अप्रैल को सीधे लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि पहले के आदेश को न तो किसी उच्च प्राधिकारी ने निरस्त किया था और न ही संबंधित अधिकारी ने वापस लिया था। ऐसे में पुराने आदेश के अस्तित्व की अनदेखी कर जारी किया गया निरस्तीकरण आदेश कानूनी रूप से गलत है।
⏱️ जिला प्रशासन को 60 दिनों का अल्टीमेटम: आर्म्स एक्ट की धारा 17 के तहत दोबारा निर्णय लेने के निर्देश
हाई कोर्ट ने आर्म्स एक्ट की धारा 17 के तहत खेल श्रेणी के लाइसेंस को आत्मरक्षा श्रेणी में बदलने की वैधानिकता पर पुनर्विचार आवश्यक माना है। कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट भोपाल को 60 दिनों के भीतर स्वतंत्र विचार कर कारणयुक्त नया आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता को 26 अक्टूबर 2026 को संबंधित प्राधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होगा, जिसके बाद श्रेणी परिवर्तन की वैधता पर जिला प्रशासन नया निर्णय लेगा।