शारदीय नवरात्र की पूर्व संध्या पर शनिवार शाम मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन स्थित माता हरसिद्धि का आंगन आस्था और प्रकाश के उजियारे से जगमगा उठा। नवरात्र के पहले दिन हजारों श्रद्धालुओं ने संध्या आरती में भाग लिया और मंदिर की ऐतिहासिक दीपमालिकाओं के अलौकिक दर्शन किए। परंपरा के अनुसार, शारदीय नवरात्र के इन नौ दिनों तक मंदिर में प्रतिदिन शयन आरती नहीं होगी और पुजारी निरंतर देवी की विशेष पूजा-अर्चना व अनुष्ठान संपन्न करेंगे।
🏛️ 52 शक्तिपीठों में शामिल है हरसिद्धि मंदिर, माता सती की कोहनी गिरने से हुई थी स्थापना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शक्तिपीठ हरसिद्धि देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती के दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव के आदेश पर देवी चंडी ने चंड और प्रचंड नामक दैत्यों का वध किया था, जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें ‘हरसिद्धि’ होने का वरदान दिया था। यही वजह है कि वर्षभर अपनी हर मनोकामना सिद्ध कराने के लिए दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचते हैं और नवरात्र के विशेष अवसरों पर मंदिर में दीपमालिकाएं प्रज्वलित की जाती हैं।
⏰ घट स्थापना के शुभ मुहूर्त और उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
नवरात्र के पहले दिन शहर में घट स्थापना के लिए कई शुभ मुहूर्त तय किए गए हैं, जिनमें सुबह 8 से 9:30 (चंचल), 9:30 से 11 (लाभ), 11 से दोपहर 12:30 (अमृत), दोपहर 11:50 से 12:40 (अभिजीत) और दोपहर 2 से 3:30 (शुभ) बजे तक का समय शामिल है। हरसिद्धि मंदिर में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालु सुगमता से माता के दर्शन कर सकें।