मध्य प्रदेश के धार शहर सहित पूरे जिले में रविवार को शुभ मुहूर्त में घट स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र महापर्व का उत्साहपूर्वक आगाज हो गया है। अगले दस दिनों तक पूरा नगर मां की भक्ति और डांडियों की गूंज में सराबोर रहेगा। प्राचीन और ऐतिहासिक मां गढ़ कालिका मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है, जहां मंदिर के आंगन से लेकर शिखर तक रंग-बिरंगी आकर्षक लाइटें जगमगा रही हैं। अलसुबह होने वाली काकड़ आरती में हजारों श्रद्धालु शामिल होकर मां के दर्शन कर रहे हैं।
🏛️ परमार राजवंश से जुड़ा है गढ़ कालिका मंदिर का इतिहास, 110 फीट ऊंची पहाड़ी पर है स्थित
धार शहर की सबसे ऊंची पहाड़ी और देवी सागर तालाब के पास स्थित मां गढ़ कालिका का यह प्राचीन मंदिर परमार स्थापत्य कला का एक अनूठा उदाहरण है। वर्ष 1770 में पंवार राजवंश के दौरान इस मंदिर का निर्माण कराया गया था, और यहां की देवी प्रतिमा को विशेष रूप से प्रतिष्ठित किया गया था। मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 157 सीढ़ियां पार करनी पड़ती हैं। मान्यता है कि यह मंदिर पंवार वंश की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है, जहां देश भर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
🛡️ सुरक्षा के कड़े इंतजाम और सप्तमी से सजेंगे भव्य गरबे, दिनभर गूंजेंगे भक्ति गीत
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर और गर्भगृह में पुलिस बल तैनात है तथा सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। वहीं, शहर में 40 से अधिक स्थानों पर सार्वजनिक गरबा पंडाल सजाए गए हैं, जहां सप्तमी से पूर्णिमा तक पूरी रात डांडियों की गूंज सुनाई देगी। मंदिर में प्रतिदिन छह अलग-अलग आरतियों का क्रम जारी है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।