नर्मदा नदी के बीच छिपा रहस्यमयी जोगा किला, इतिहास की सैर सिर्फ नाव से

देवास: मध्य प्रदेश के देवास और हरदा जिले की सीमा पर नर्मदा नदी के बीचोबीच एक किला मौजूद है. हरियाली की चादर ओढ़े एक टापू नुमा विशाल टीले पर स्थित है जोगा किला, जो मुगल-जाट इतिहास की गवाही देता है. इस किले की खूबसूरती को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं. खास बात है कि नाव के जरिए किले तक पहुंचा जा सकता है.

नाव के जरिए पहुंचते हैं किले तक
ETV BHARAT की टीम देवास जिला मुख्यालय से 150 KM का सफर तय कर सड़क, कच्चे रास्ते और पगडंडी के बाद नर्मदा नदी के किनारे पहुंची. यहां से एक मात्र साधन नाव के माध्यम से किले तक पहुंची और कैमरे के माध्यम से मनमोहक नजारा आप तक पहुंचाने का प्रयास किया है. इस किले (दुर्ग) में दो भाग हैं और यहां पहुंचने के लिए भी दो रास्ते हैं. आज भी इस किले पर पहुंचने का एकमात्र साधन है नाव. नाव के माध्यम से इस किले पर पर्यटक पहुंचते हैं.

किले में मौजूद जनरल का मकबरा
नाव से किले पर पहुंचने पर कुछ कदम ऊपर चलते ही किले का मुख्य द्वार आता है जो बेहद ही विशाल और मजबूत है. मुख्य द्वार से सीढ़ियों के मध्यम से किले के ऊपर पहुंचने पर किले की दीवारों पर झरोखे दिखना शुरू हो जाते हैं. ऊपर से नीचे का पूरा नजारा साफ दिखाई देता है. वहीं, किले की कमान संभालने वाले एक जनरल का मकबरा भी इस किले के ऊपरी हिस्से पर मौजूद है. लोग यहां परिवार, रिश्तेदार, दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने आते हैं. साथ ही किले पर घूमते हुए सेल्फी लेते हुए भी लोग नजर आते हैं.

किले से नजर आते हैं हसीन नजारे
किले के ऊपर से नर्मदा नदी में सूर्य उदय और सूर्यास्त का मनमोहक दृश्य दिखता है. यह किला नर्मदा नदी के बीच में है, इसलिए किले के चारों तरफ पानी ही पानी के साथ प्राकृतिक सुंदर नजारे दिखते हैं. किले के चारों तरफ हराभरा पर्यावरण, वन्य प्राणी, पशु पक्षियों का नजारा देखते ही बनता है. प्रदेश के पर्यटन और पुरातत्व विभाग को इस किले पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि देश का यह खूबसूरत पर्यटन स्थल बन सके.

सुल्तान होशंगशाह गौर ने बनवाया था किला
इस किले (दुर्ग) का निर्माण 1406 ई में मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर मांडू के सुल्तान होशंगशाह गौर द्वारा करवाया था. बताते हैं, कुछ जाट शासक राव जोगा सिंह द्वारा भी बाद में इस किले पर शासन करते हुए जीणोद्धार कराया था. यह (किला) दुर्ग देवास और हरदा जिले की सीमा पर सुरक्षा की दृष्टि से नर्मदा नदी के बीचोबीच बना हुआ है. नाव के माध्यम से इस किले पर पर्यटक पहुंचते है. नाव से किले पर पहुचने पर कुछ कदम ऊपर चलते ही किले का मुख्य द्वार आता है जो बेहद ही विशाल और मजबूत है.

खंडहर हुआ बंदूक-तोप खाना
इतिहासकार दिलीप जाधव बताते हैं, ”इस किले का निर्माण 1406 ई में मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर मांडू के सुल्तान होशंगशाह गौर द्वारा करवाया था. दुश्मनों के हमलों से बचने और सुरक्षा की दृष्टि से नर्मदा नदी के बीचो-बीच चारों ओर पानी में एक टापू पर यह किला बनवाया गया. किले की कड़ी सुरक्षा के लिए किले के चारों तरफ बंदूकें और तोपों के लिए स्थान आज भी खण्डरों के रूप में देखा जा सकता है. इस किले में दो भाग हैं और पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं. आज भी इस किले पर पहुंचने के लिए नाव, डोंगा से या तैरकर जाना पड़ता है.
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