नोएडा बिल्डिंग हादसे में 4 लोगों की मौत! कारण घटिया सामग्री या बड़ी साजिश? क्या था हादसे का असली कारण? जांच शुरू

दिल्ली से सटे यूपी के ग्रेटर नोएडा में बुधवार सुबह दर्दनाक हादसा हुआ था. तीन मंजिला मकान के शटरिंग हटाने के दौरान हुए इस हादसे में 11 मजदूरों में से 4 की मौत हो गई है. जबकि, 7 मजदूरों को पुलिस और एनडीआरएफ की मदद से मलबे से बाहर निकाल कर उनका उपचार कराया जा रहा है.

मामला रबूपुरा थाना क्षेत्र इलाके के नगला हुकुम सिंह गांव का है. हादसे के बाद जेवर विधायक मौके पर पहुंचे. पूरे मामले का संज्ञान लेकर इसकी जांच और मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की शिकायत करने की बात कही है. जबकि बताया यह जा रहा है कि अधिक मुआवजा लेने के चक्कर में ये सभी लोग अवैध निर्माण करवा रहे थे. हालांकि, पुलिस की तरफ से अभी कोई ऐसा बयान सामने नहीं आया. मृतकों में जीशान, शाकिर, नदीम और कामिल शामिल हैं. इनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.

घटिया सामग्री और अधिक मुआवजे के लालच में हुआ निर्माण कार्य?

हादसा होने के बाद पुलिस एनडीआरएफ की टीम फायर ब्रिगेड की टीम में प्राधिकरण के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत बचत कार्य में लग गए. इसके बाद यह बात सामने आई कि अभी हाल ही में प्राधिकरण ने यहां पर अवैध निर्माण को लेकर बुलडोजर चलाया था. बावजूद इसके यहां पर निर्माण कार्य हो रहा था. ये किसके कहने पर किया जा रहा था, इसकी अभी जांच होनी बाकी है. हालांकि, विधायक के हस्तक्षेप के बाद मृत्यु को के परिवार वालों को आर्थिक सहायता देने के बाद कही गई है. साथ ही इस पूरे हादसे में जांच और मुख्यमंत्री से शिकायत करने की भी बात कही गई है.

पढ़ें हादसे का पूरा विवरण-

क्या हुआ: तीसरी मंजिल के लेंटर की शटरिंग हटाते समय इमारत ढह गईं, जिससे नीचे की दोनों मंजिलें भी ध्वस्त हो गईं. कितने लोग प्रभावित हुए: मलबे के नीचे 11 मजदूर दब गए, जिनमें से 4 की मौत हो गई और बाकी घायल हुए हैं. बचाव कार्य: सूचना मिलते ही पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान चलाया. कारण: प्रथम दृष्टया, यह एक अवैध निर्माण था और शटरिंग हटाने के दौरान संरचना के कमजोर होने के कारण हादसा हुआ.

पहले भी ग्रेटर नोएडा में होते रहे हैं ऐसे ही हादसे

यह कोई नया मामला नहीं है. इससे पहले भी ग्रेटर नोएडा वेस्ट के शाहबेरी इलाके में साल 2018 में एक छह मंजिला इमारत भी भरभरा कर गिर गई थी. इसमें भी कई लोगों की मौत हुई थी. इस हादसे ने पूरे प्रदेश में हलचल पैदा कर दी थी. उसके बाद प्राधिकरण के अधिकारी नींद से जागे और लगभग 200 बिल्डिंगों को अवैध बताकर चिन्हित कर दिया, जो आज तक बंद पड़ी हैं. लेकिन अभी भी वहां पर कोई ना कोई निर्माण कार्य होता रहता है, जिसके वीडियो आए दिन लगातार सामने आते रहते हैं.

परिवार वालों पर टूटा दुखों का पहाड़

इस हादसे में मारे गए चार मजदूरों के परिवार वालों का र-रो कर बुरा हाल है. मृतक मजदूर मेहनत मजदूरी करके अपने परिवारों का पालन पोषण कर रहे थे. अब उनके परिवारों को उम्मीद है कि सरकार या प्राधिकरण द्वारा उन्हें कोई आर्थिक मदद जरूर मिलेगी.

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