भोपाल: मध्य प्रदेश में रबी और खरीफ के सीजन में हर बार खाद को लेकर संकट पैदा होता है. खाद के लिए लगने वाली किसानों की लंबी लाइनें और खाद को लेकर मारमारी की खबरें हमेशा सुर्खियां बनती हैं, लेकिन प्रदेश में अब जल्द ही किसानों को घर बैठे गैस सिलेंडर की तरह खाद भी मिलेगी. प्रदेश सरकार पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तीन जिलों से यह व्यवस्था शुरू करने जा रही है. उधर सरकार की इस सोच के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार का धन्यवाद देते हुए सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि जब क्षेत्र में पर्याप्त खाद ही नहीं होगी, तो खाद घर-घर कैसे पहुंचेगी.
इन तीन जिलों में शुरू होगी योजना
राज्य सरकार एलपीजी गैस सिलेंडर की तर्ज पर घर-घर खाद वितरण की व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रही है. जिस तरह गैस सिलेंडर की बुकिंग कराने के बाद एलपीजी सिलेंडर निर्धारित समय पर घर पहुंचता है, ठीक इसी तरह खाद भी किसानों के घर तक पहुंचेगी. यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रदेश के तीन जिलों विदिशा, शाजापुर, जबलपुर से शुरू की जाएगी. इसमें किसानों को खाद की बुकिंग करनी होगी और बुकिंग के दौरान होम डिलीवरी का विकल्प चुनना होगा.
होम डिलीवरी के लिए किसानों को इसका निर्धारित किराया भी देना होगा. पायलट प्रोजेक्ट के लिए खाद वितरण केन्द्र के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले किसानों को ई टोकन सिस्टम दिए जाएंगे और उन्हें खाद उपलब्ध कराई जाएगी.
कांग्रेस ने उठाया सवाल
उधर सरकार की इस पहल पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि “खाद की होम डिलीवरी की सोच के लिए सरकार को धन्यवाद, लेकिन अभी तक सरकार ने खाद की लाइन में लगने वालों को डंडे ही दिए हैं. केन्द्रीय कृषि मंत्री ने खुद स्वीकार किया है कि प्रदेश में खाद की डिमांड ही कम की गई थी, इसलिए प्रदेश में खाद का संकट गहराया था. जबकि बीजेपी के सांसद, मंत्री विधायक हमेशा कहते रहे कि खाद की कमी नहीं है, लेकिन जिस मंत्री ने भी यह बयान दिया, उसके क्षेत्र में भी किसानों को खाद के नाम पर डंडे मिले हैं. खाद रहेगा तो घर डिलीवरी होगी, जब यह होगी ही नहीं तो कैसे खाद मिलेगी.”
रबी सीजन में खाद के लिए लगी थी लाइनें
खाद की कमी को लेकर रबी और खरीफ सीजन में हर साल किसानों की लाइनें लगती हैं. सितंबर माह के दौरान भी प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में किसानों ने खाद न मिलने के चलते प्रदर्शन तक किए थे. हालांकि कृषि विभाग की तरफ से दावा किया गया कि प्रदेश में मक्का और धान का रकबा बढ़ने से यूरिया की मांग बढ़ गई. उधर जितनी मांग बढ़ी, उसके मुकाबले उतना यूरिया प्रदेश में उपलब्ध ही नहीं था.
प्रदेश में खाद को लेकर जब किसानों की नाराजगी बढ़ी तो केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “खाद वितरण में लापरवाही के चलते किसानों को परेशानी हुई है.” उधर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी कलेक्टरों को इसके लिए फटकार लगाई थी.