फर्जीवाड़ा कर दो भाई पुलिस अफसर बने, आगरा में दोनों ने की नौकरी…एक रिटायर भी हो गया; 27 साल बाद कैसे खुली पोल?

उत्तर प्रदेश के आगरा पुलिस महकमे में मृतक आश्रित कोटे से भर्ती हुए दो सगे भाइयों के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. इस मामले में एसीपी नागमेंद्र लांबा, जो अब रिटायर हो चुके हैं. उनके छोटे भाई इंस्पेक्टर योगेंद्र लांबा पर फर्जी तरीके से नौकरी पाने का आरोप है. पुलिस आयुक्त ने इस पूरे मामले की विभागीय जांच एडीसीपी क्राइम हिमांशु गौरव को सौंपी है.

डीसीपी ट्रैफिक अभिषेक अग्रवाल की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इंस्पेक्टर योगेंद्र लांबा ने फर्जी कागजात के आधार पर नौकरी पाई थी. जांच के बाद दोनों भाइयों को आरोप पत्र दिए गए हैं और उनसे जवाब मांगा गया है. इस केस के सामने आने के बाद रिटायर एसीपी नागमेंद्र लांबा की पेंशन और अन्य लाभ रोक दिए गए हैं, जबकि इंस्पेक्टर योगेंद्र लांबा का वेतन भी रोक दिया गया है. फिलहाल, योगेंद्र लांबा पुलिस लाइन में तैनात हैं.

कैसे सामने आया मामला?

यह पूरा मामला तब सामने आया, जब डीजी मुख्यालय को एक गुप्त शिकायत मिली, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नागमेंद्र लांबा और योगेंद्र लांबा दोनों ने मृतक आश्रित कोटे में नौकरी ली है. यह जांच डीसीपी ट्रैफिक अभिषेक अग्रवाल को दी गई. दिलचस्प बात यह है कि दोनों भाई पिछले तीन साल से आगरा में एक साथ तैनात थे. नागमेंद्र लांबा अकाउंट सेक्शन में थे और वह अपने भाई योगेंद्र का भी वेतन तैयार करते थे.

मैनुअल रिकॉर्ड्स की होगी पड़ताल

जांच में पता चला कि नागमेंद्र लांबा 1986 में हल्द्वानी (तब उत्तर प्रदेश का हिस्सा) से पुलिस में भर्ती हुए थे, जबकि उनके भाई योगेंद्र लांबा 1997 में मेरठ से भर्ती हुए. वर्तमान नियमों के अनुसार, मृतक आश्रित कोटे में आवेदन की समय सीमा पांच साल है. 1997 में डिजिटल रिकॉर्ड नहीं थे. इसलिए जांच अधिकारी उस समय के मैनुअल रिकॉर्ड्स की पड़ताल करेंगे. इसके साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि योगेंद्र की भर्ती के समय किसने यह शपथ पत्र दिया था कि यह परिवार की पहली और एकमात्र मृतक आश्रित भर्ती है.

पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने इस मामले को लेकर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं. यह एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें प्रारंभिक जांच करने वाले अधिकारियों के भी बयान दर्ज किए जाएंगे. पुलिस महकमे में चर्चा है कि यह गोपनीय शिकायत किसी ऐसे पुलिसकर्मी ने की है, जिसे दोनों भाइयों के बारे में पूरी जानकारी थी. माना जा रहा है कि यह शिकायत किसी ऐसे व्यक्ति ने की होगी, जो नागमेंद्र लांबा से बिलों के भुगतान को लेकर परेशान था.

दोनों भाई 27 साल की नौकरी कर चुके

अब तक दोनों भाई करीब 27 साल की नौकरी कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने जितना भी वेतन और भत्ता लिया, उसकी भी जांच की जा रही है. आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि दोनों भाइयों ने फर्जी तरीके से नौकरी पाई थी या नहीं. इस तरह एक ही परिवार के दो भाइयों ने अपने पिता की मौत के बाद मृतक आश्रित कोटे से पुलिस में नौकरी हासिल कर ली. जबकि नियमों के अनुसार, मृतक आश्रित कोटे में परिवार के सिर्फ एक सदस्य को नौकरी मिल सकती है. नौकरी पाने वाले सदस्य के पक्ष में परिवार के अन्य सदस्यों की नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) भी जरूरी होती है.

मालवा अभीतक की ताजा खबर सीधे पाने के लिए : 
ताज़ा ख़बर पाने के लिए एंड्राइड एप्लीकेशन इनस्टॉल करें :

यूनियन कार्बाइड की खंडहर दीवारों में अब गूंजेगी न्याय की कहानी! भोपाल गैस मेमोरियल बनाने पर लगी मुहर, सरकार ने हाई कोर्ट में बताया पूरा प्लान     |     भोपाल के कोलार में ‘गैस माफिया’ पर शिकंजा! 25 अवैध सिलेंडर जब्त, ब्लैक में बेचने की थी बड़ी तैयारी; प्रशासन की रेड से मचा हड़कंप     |     Ladli Behna Yojana Update: मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से ट्रांसफर किए 1836 करोड़ रुपये, जानें अगली किस्त और राहुल गांधी पर CM के तीखे प्रहार     |     अध्यात्म का महामिलन! बागेश्वर धाम पहुंचे सद्गुरु, धीरेंद्र शास्त्री से की खास मुलाकात; साथ आए 40 देशों के मेहमान भी हुए बाबा के मुरीद     |     भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ‘गैंगवार’! घायल के पीछे इमरजेंसी गेट तक पहुंचे हमलावर, सरेआम गोलियां चलने से अस्पताल में मची भगदड़     |     शहडोल के लिए ऐतिहासिक दिन! मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ अपना ब्लड सेंटर, अब MBBS की सीटें भी होंगी डबल; जानें आम जनता को क्या होगा फायदा     |     इंदौर में ‘महामुकाबला’! नेहरू स्टेडियम में चौकों-छक्कों की बारिश, संतों के आशीर्वाद और द ग्रेट खली की दहाड़ के बीच क्रिकेट का रोमांच     |     Shivpuri Fire News: शिवपुरी में दुकान और गोदाम में लगी आग, फंसे हुए परिवार ने साड़ी के सहारे उतरकर बचाई जान; लाखों का माल खाक     |     Jabalpur Police Action: जबलपुर एसपी ने 26 टीआई (TI) को दी एक साथ सजा, जानें पुलिस प्रभारियों पर क्यों गिरी गाज और क्या है पूरा मामला?     |     “नाम बदला, मजहब बदला पर किस्मत नहीं”—11 साल बाद MP पुलिस की गिरफ्त में आया मोस्ट वांटेड! भगोड़े के नए ठिकाने का ऐसे चला पता     |