पहले फरार आरोपियों की मौत के दावे से मचाई सनसनी, अब भागवत की गिरफ्तारी का खुलासा… कौन हैं महबूब मुजावर?

महाराष्ट्र के मालेगांव में साल 2008 में बम धमाका हुआ था. हाल ही में पूरे 17 साल बाद इस केस के मुख्य आरोपी समेत 7 आरोपियों को बरी कर दिया गया है. यह केस लगातार कई बार सुर्खियों में बना रहा. वहीं, इस केस से जुड़ा एक नाम भी कई बार कई बड़े खुलासे करने के चलते सुर्खियों में आया है. यह नाम है पूर्व ATS अधिकारी महबूब मुजावर का.

पूर्व ATS अधिकारी मालेगांव जांच का हिस्सा रहे हैं. इसी बीच जहां अब आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर समेत कर्नल पुरोहित समेत बाकी आरोपियों को बरी कर दिया गया है. वहीं, पूर्व अधिकारी के एक खुलासे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अधिकारी ने दावा किया है कि उन्हें इस केस में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के आदेश दिए गए थे.

कौन हैं महबूब मुजावर?

महबूब मुजावर ATS के पूर्व अधिकारी हैं. मालेगांव ब्लास्ट केस की जांच में वो भी शामिल थे. मुजावर ने हाल ही में मोहन भागवत को किस तरह साजिश के तहत गिरफ्तार करने के आदेश दिए गए थे इसको लेकर बड़ा खुलासा किया है. इसी के बाद से कई सवाल उठाए जा रहे हैं. इसी बीच कई लोगों के मन में यह सवाल आ रहे होंगे कि 17 साल बाद मुजावर ने यह बड़े खुलासे किए हैं. इससे पहले उन्होंने कोई खुलासा क्यों नहीं किया. चलिए आपके इस सवाल का जवाब जान लेते हैं.

पूर्व अधिकारी मुजावर ने इससे पहले भी साल 2016 में बड़े खुलासे किए हैं. इस केस में 9 लोगों को आरोपी माना गया था. साध्वी प्रज्ञा के अलावा कर्नल प्रसाद पुरोहित, रमेश उपाध्याय, अजय राहिलकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकरधर द्विवेदी को आरोपी बनाया गया था और इनको बरी किया जा चुका है. वहीं, इनके साथ ही संदीप डांगे और राम कलसांगरा को भी आरोपी माना गया था. लेकिन, आज तक रिकॉर्ड के हिसाब से यह दोनों फरार हैं.

जहां एक तरफ रिकॉर्ड के हिसाब से इन्हें फरार माना गया है. वहीं, दूसरी तरफ मुजावर ने बड़ा दावा किया था. दिसंबर 2016 में मुजावर ने दावा किया था कि दो प्रमुख आरोपी, संदीप डांगे और राम कलसांगरा, “अब जिंदा नहीं हैं” लेकिन पुलिस अधिकारी उन्हें अभी भी जीवित दिखा रहे हैं.

मुजावर ने 19 अगस्त, 2016 को सोलापुर अदालत में एक लिखित आवेदन पेश किया था कि दो आरोपी, रामचंद्र कलसांगरा और संदीप डांगे, जिन्हें मालेगांव विस्फोट मामले में कागजों पर वॉनटेड दिखाया गया है, उनको एटीएस ने 28 नवंबर, 2008 (मुंबई आतंकवादी हमले के दिन) को मार गिराया था.

मुजावर ने फिर किया दावा

जब मुजावर के दावे के बारे में पूर्व एटीएस प्रमुख के पी रघुवंशी ने से पूछा गया था तो उन्होंने इसे खारिज करते हुए कहा था, मुझे यह भी याद नहीं है कि यह मुजावर कौन है या वह मामले की जांच करने वाली टीम का हिस्सा था भी या नहीं. अपने हाल ही के दिए बयान में भी मुजावर ने एक बार फिर दावा किया है कि मुजावर ने यह भी दावा किया कि जिन संदिग्धों संदीप डांगे और रामजी कलसंगरा की हत्या हो चुकी थी, उन्हें जानबूझकर चार्जशीट में जिंदा दिखाया गया. मुझे आदेश दिया गया कि उनकी लोकेशन ट्रेस करो, जबकि वो मर चुके थे.

मुजावर पर क्या हैं आरोप

महबूब मुजावर पर Arms Act के तहत अप्रैल 2009 में आरोप दर्ज किए गए थे. साथ ही उन्हें आर्म्स एक्ट और आपराधिक धमकी के मामले में निलंबित किया गया था. साथ ही उन्हें आय से अधिक संपत्ति मामले में भी आरोपी माना गया था. हालांकि, इन आरोपों के दर्ज होने के बाद हाल ही में पूर्व अधिकारी ने कहा, मैंने आदेशों का पालन नहीं किया, इसलिए मेरे खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर दिया गया और इसने मेरे 40 साल के करियर को बर्बाद कर दिया.

मोहन भागवत को लेकर बड़ा खुलासा

ATS के पूर्व पुलिस अधिकारी ने दावा किया है कि उन्हें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के आदेश दिए गए थे. रिटायर इंस्पेक्टर महबूब मुजावर ने बताया, भगवा आतंकवाद थ्योरी एक झूठ थी, मुझे मोहन भागवत को फंसाने के आदेश मिले थे. उन्होंने कहा, मोहन भागवत को पकड़ कर लाने के लिए इसीलिए कहा गया था क्योंकि स्थापित करना था यह ब्लास्ट भगवा आतंक था.

मालेगांव ब्लास्ट केस

महाराष्ट्र के मालेगांव में साल 2008 में ब्लास्ट हुआ था. यह एक मुस्लिम इलाका है. यहां रमजान के महीने में एक बाइक पर ब्लास्ट हुआ था. इस धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी. वहीं, 101 लोग घायल हो गए थे. इसी के बाद पूरे 17 साल बाद अब इस मामले में आरोपियों को बरी कर दिया गया है.

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