जौरा में BSP की मजबूत पकड़, क्या BJP या कांग्रेस फिर दिखाएंगे जलवा

जौरा विधानसभा सीट मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से एक है और यह उन 79 सीटों में से एक है जो 1951 में अस्तित्व में आई थीं. यह सीट मुरैना जिले में पड़ती है. मुरैना जिले में जौरा समेत 6 विधानसभा सीटें आती हैं. जौरा सीट पर कभी किसी दल का एकाधिकार नहीं रहा है. हर बार चुनाव में यहां पर बाजी पलट जाती है. 2018 में कांग्रेस ने चुनाव में जीत हासिल की थी, लेकिन 2020 में हुए उपचुनाव में बीजेपी ने यह सीट छीन ली थी.
मुरैना क्षेत्र में केंद्रीय कृषि मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर जैसे दिग्गज नेताओं का खासा दबदबा है. जौरा सीट पर अभी बीजेपी का कब्जा है. 2018 के चुनाव 20 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला रहा था, जिसमें कांग्रेस के बनवारी लाल शर्मा विजयी रहे थे. बनवारी लाल ने बहुजन समाज पार्टी के मीनाराम धाकड़ को हराया था. जबकि बीजेपी के सूबेदार सिंह राजोधा तीसरे स्थान पर रहे थे. बनवारी लाल ने 15,173 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी. लेकिन उनके निधन के बाद जौरा में उपचुनाव कराना पड़ा था.

उपचुनाव में मिली बीजेपी को जीत

2020 में जौरा में हुए उपचुनाव में 15 उम्मीदवार मैदान में थे जबकि मुख्य मुकाबला बीजेपी के सूबेदार सिंह राजोधा और कांग्रेस के पंकज उपाध्याय के बीच था. खास बात यह है कि 2018 के चुनाव में तीसरे स्थान पर रहने वाले सूबेदार सिंह ने इस बार चुनाव में बड़े अंतर (13,478) से जीत हासिल कर ली. 2018 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले सोनेराम कुशवाह ने 2020 के उपचुनाव में बसपा के टिकट से चुनाव लड़े और तीसरे स्थान पर रहे. नोटा चौथे स्थान रहा और उसे 718 वोट मिले.
1990 से जौरा सीट के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो 1990 के चुनाव में जनता दल के सूबेदार सिंह विजयी रहे थे. 1993 के चुनाव में बसपा के सोनेराम कुशवाह ने पिछली हार का बदला लेते हुए यह सीट जीत ली. 1998 में बसपा के ही टिकट पर सोनेराम ने फिर जीत हासिल की. हालांकि 2003 के चुनाव में खेल बिगड़ गया और सोनेराम चौथे स्थान पर रहे.

जौरा का राजनीतिक समीकरण

कांग्रेस के उम्मीदवार उम्मेद सिंह बाना ने चुनाव में जीत हासिल की. उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी मनी राम ढाकर को कड़े मुकाबले में 2,753 मतों के अंतर से जीत हासिल की. तब बीजेपी के प्रत्याशी महेश मिश्रा छठे स्थान पर रहे थे. 2008 के चुनाव में बीजेपी ने प्रदर्शन में सुधार किया और प्रत्याशी नगेंद्र तिवारी तीसरे स्थान पर रहे. इस बार बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाल मनी राम ढाकर ने 8,595 मतों के अंतर से जीत हासिल कर ली.
2013 के चुनाव में बीजेपी ने जीत का सिलसिला शुरू किया और सूबेदार सिंह जो पिछले चुनाव में तीसरे स्थान पर थे, इस बार विजेता बनकर सामने आया. उन्होंने कांग्रेस के बनवारी लाल को हरा दिया. लेकिन बनवारी लाल ने 2018 के चुनाव में पिछली हार का बदला लेते हुए बसपा के मीनाराम धाकड़ को हरा दिया. बीजेपी एक बार फिर तीसरे स्थान पर खिसक गई. 2020 के उपचुनाव में बीजेपी ने 1990 के बाद यहां दूसरी बार जीत का स्वाद चखा.
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