केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर उठाए जा रहे कदम के पीछे ‘चुनावी एजेंडा’ है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस संबंध में उठाए गए कदम को वापस लेने की भी अपील की।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता विजयन ने यहां जारी बयान में कहा कि केंद्र के कदम को ‘‘ देश की बहु सांस्कृतिक विविधता को मिटाकर केवल बहुमत के सांप्रदायिक एजेंडे ‘एक देश, एक संस्कृति’ को लागू करने की योजना’ के तौर पर देखा जा सकता है।” उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार और विधि आयोग को समान नागरिक संहिता के संदर्भ में उठाए गए कदमों को वापस ले लेना चाहिए।”
विधि आयोग को कितनी प्रतिक्रियाएं मिलीं?
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर छिड़ी जुबानी जंग के बीच भारतीय विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी ने बुधवार को कहा कि इस मामले पर सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया शुरू करने के केवल दो सप्ताह के भीतर आयोग को 8.5 लाख प्रतिक्रियाएं मिली हैं। विधि आयोग ने 14 जून को राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे पर लोगों और मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों सहित सभी हितधारकों से विचार आमंत्रित किए थे। न्यायमूर्ति अवस्थी ने बताया, ”कल तक हमें लगभग 8.5 लाख प्रतिक्रियाएं मिलीं।”
यूसीसी का मतलब
यूसीसी का आमतौर पर मतलब है- देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना, जो धर्म पर आधारित न हो। पर्सनल लॉ और विरासत, गोद लेने और उत्तराधिकार से संबंधित कानूनों को एक समान संहिता द्वारा कवर किये जाने की संभावना है। यूसीसी का कार्यान्वयन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा रहा है। उत्तराखंड पहले से ही अपनी समान नागरिक संहिता बनाने की प्रक्रिया में है। भाजपा ने हाल के विधानसभा चुनावों से पहले कर्नाटक में भी यूसीसी का वादा किया था।