कृषि विज्ञान केंद्र शाजापुर द्वारा दिनांक 1 जून 2023 को पर्यावरण के लिए मिशन लाइफ अंतर्गत ग्राम निपानिया डाबी में किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया ! कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्र की वैज्ञानिक डॉ गायत्री वर्मा रावल एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ डीके तिवारी द्वारा किसानों को पर्यावरण को बचाने तथा जीवन शैली मैं सुधार लाने हेतु मिशन लाइफ जागरूकता कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई !
मिशन लाइफ: पर्यावरण की रक्षा और संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए भारत के नेतृत्व वाला वैश्विक जन आंदोलन कार्यक्रम है जोकि 20 मई 2023 से 5 जून 2023 तक मनाया जाना है।
पर्यावरण के लिए मिशन लाइफस्टाइल मानता है कि भारतीय संस्कृति और जीवित परंपराएं स्वाभाविक रूप से टिकाऊ हैं।
पर्यावरण के लिए जीवन शैली (जीवन)
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (UNFCCC COP26) के अवसर पर, माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए लोगों को व्यक्तिगत रूप से शामिल करने के लिए “LiFE (पर्यावरण के लिए जीवन शैली)” के अभियान की शुरुआत की।
यह पहल एक ऐसी जीवन शैली को प्रोत्साहित करती है जो संसाधनों के सावधानीपूर्वक एवं सोद्देश्यपूर्ण उपयोग पर ध्यान केंद्रित करती है और इसका ध्येय प्रचलित ‘उपयोग और निपटान’ उपभोग की आदतों को बदलना है। इसके पीछे का आशय लोगों को अपने दैनिक जीवन में उन साधारण परिवर्तनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है जो जलवायु परिवर्तन में योगदान कर सकते हैं।
LiFE मिशन का एक अन्य पहलू जलवायु परिदृश्य में बदलाव लाने के लिए सामाजिक संरचना की ताकत का उपयोग करना है। यह अभियान पर्यावरण के प्रति उत्साही/ समर्थक लोगों के एक ऐसे वैश्विक संगठन बनाने की भी योजना बना रहा है जो पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली को अपनाने और बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जिन्हें ‘प्रो-प्लैनेट पीपल’ के रूप में जाना जाएगा|
निम्नलिखित क्षेत्र हैं जिन्हें LiFE के तीन स्तंभों के अंतर्गत समूहीकृत किया गया है:
व्यक्तिगत व्यवहार पर ध्यान देना
सिंगल यूज प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता; साइकिल, ई-बाइक, ई-कार जैसे परिवहन के स्थायी साधनों के बारे में ज्ञान; पानी की बर्बादी के बारे में जागरूकता; पर्यावरण संबंधी सूचकों के बारे में ज्ञान (जैविक, प्लास्टिक मुक्त, क्षतिमुक्त, ऊर्जा तारांकित सूचक, आदि); उपभोग की आदतें और उन्हें हरित बनाना – व्यक्तिगत कार्बन फुटप्रिंट का आकलन करना; प्राकृतिक ऊर्जा का उपयोग (पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, द्रवचालित ऊर्जा); पारिधानिक सचेतता (चमड़ा, फर, पशु परीक्षण उत्पादों को छोड़ना) आदि के बारे में ज्ञान।
विश्व स्तर पर सह-निर्माण
वैश्विक स्तर पर परिवर्तन के लिए मापनीय धारणाएं। उदाहरण के लिए, कार्बन-प्रदूषणकारी उद्योगों के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में ज्ञान, ग्रह-अनुकूल निवेशों के बारे में जागरूकता, सुव्यवस्थित ऊर्जा खपत आदि को लागू करना।
स्थानीय संस्कृतियों का लाभ
सामुदायिक उद्यानों के बारे में जागरूकता, कचरे से उत्पाद बनाने के बारे में ज्ञान, कपड़ों के पुनर्चक्रण के बारे में साक्षरता, शहरी खेती (हाइड्रोपोनिक्स खेती) का महत्व, भोजन की बर्बादी को कम करना, समुदाय को मजबूत करने वाली गतिविधियाँ, शिक्षा संस्थानों में पढ़ाए जाने वाले पर्यावरण के पाठ, युवाओं की भागीदारी आदि।
कार्यक्रम के दौरान गांव के 40 से अधिक किसानों ने अपनी सहभागिता दी तथा पर्यावरण हेतु मिशन लाइफ जागरूकता कार्यक्रम अंतर्गत दी गई जानकारियों पर अमल करने हेतु अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई! इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के अन्य स्टाफ अंतर्गत कुमारी निकिता नंद एवं श्री गंगाराम राठौर का भी विशेष योगदान रहा