आद्य पत्रकार देवर्षि नारद मुनि जन्मोत्सव पर विश्व संवाद केंद्र द्वारा कार्यक्रम आयोजित, जनपथ के मुद्दो को राजपथ तक पहुंचाना ही है पत्रकारिता – विजय जोशी
शाजापुर। भारत में पत्रकारिता को विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बाद लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में माना जाता है, हालांकि भारतीय संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ इसलिए भी माना जाता है क्योंकि जनता की आवाज को लोकतांत्रिक तरीके से अभिव्यक्त करके सरकार तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है।
यह बात पत्रकार एवं भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी विजय जोशी ने रविवार को स्थानीय पीडब्ल्यूडी विश्राम गृह पर विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित आद्य पत्रकार देवर्षि नारद मुनि के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कहीं। उन्होंने कहा की सृष्टि के प्रथम पत्रकार के रूप में देवर्षि नारद मुनि ने संपूर्ण ब्रह्मांड में सकारात्मक पत्रकारिता करते हुए संवाद स्थापित करने का काम किया है। आज पत्रकारों की भूमिका भी वही है। लोकहित के कल्याण में जो कुछ भी हो सकता है उसके लिए पत्रकारों को संवाद स्थापित करने में अपनी भूमिका निभाना चाहिए।
भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में भी पत्रकारिता का बहुत अहम योगदान था। उस समय के पत्रकारों ने स्वतंत्रता के संघर्ष को एक मिशन की तरह लिया और अपनी कलम से ही ब्रिटिश हुकुमत की खिलाफत में लग गए उसमें पत्रकारिता का एकमात्र लक्ष्य स्वतंत्रता हासिल करना और जनता में चेतना जागृत करना रहा था। प्राचीन समय से लेकर वर्तमान समय में पत्रकारिता के कार्य वही है,लेकिन बढ़ती टेक्नोलोजी ने उसका स्वरूप बदल दिया है। वर्तमान समय की पत्रकारिता पहले की अपेक्षा बहुत सशक्त, प्रभावकारी स्वतंत्र और आसान हो गई है।. बोलने की आजादी और मीडिया की पहुंच सामाजिक सरोकारों और भलाई के लिए होने लगा है. प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ ही वेब मीडिया ने भी भारत में वह मुकाम हासिल कर लिया है जिसे कहा जा सकता है कि यह काल पत्रकारिता का स्वर्ण काल है। आजादी के बाद निश्चित रूप से इसमें बदलाव आना ही था. आज इंटरनेट और सूचना अधिकार में पत्रकारिता को बहुआयामी और अनंत बना दिया है. आज जानकारियों का अभाव नहीं है. लोगों को पलक झपकते ही जानकारियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं। एक पुस्तक में लिखा है कि ‘सूचना से अधिक महत्वपूर्ण सूचना तंत्र है’ और यह बात सही भी है कि सूचना में शक्ति होती है और पत्रकारिता तो सूचनाओं का जाल है, जिसमें पत्रकार सूचना देने के साथ-साथ सामान्य जनता को दिशानिर्देश भी देता है। आने वाला समय न्यू मीडिया और प्रौद्योगिकी का है जिसमें पत्रकारिता के उद्देश्यों और उत्तरदायित्वों को पूरा करने की संभावना बढ़ जाती है।. पत्रकारिता का काम हमेशा से ही जनपथ के मुद्दे को राजपथ तक पहुंचाने का रहा है और उम्मीद है की पत्रकारिता अपने यह काम निर्बाध रूप से आगे भी करती रहेगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ जगदीश भावसार ने कहा कि देवर्षि नारद मुनि ने सभी लोक में संदेश अदान प्रदान करने का काम किया है, इसलिए उन्हे संदेश वाहक के रूप में पहचाना जाता है और उनके इस संदेश अदान प्रदान के कारण कई बिगड़े कार्य बन जाया करते थे। ठीक उसी प्रकार वर्तमान में समाज में क्या बुरा हो रहा है आम लोगो के बीच में क्या समस्या आ रही है उन्हे बेबाक तरीके से पत्रकार अपनी कलम की ताकत से उठाता है और उसका निष्कर्ष जिम्मेदारों द्वारा निकाला जाता है। इस प्रकार के कुछ उदाहरण भी उन्होंने प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के पूर्व आद्य पत्रकार देवर्षि नारद मुनि के चित्र पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण के साथ दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। पत्रकार पीयूष भावसार एवं अमित शर्मा ने अतिथियों को श्रीफल देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार भरत चतुर्वेदी ने किया तथा आभार पत्रकार आकाश शर्मा ने माना। इस अवसर पर प्रिंट, इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ साहित्यकार एवं लेखक उपस्थित रहे।