शाजापुर
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कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री दिनेश जैन ने जिले की बावडियों, कुओ जैसी जल संरचनाओं में सुरक्षात्मक व्यवस्थायें सुनिश्चित करने के लिए भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के अन्तर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।
उल्लेखनीय है कि विगत 30 मार्च 2023 को राम नवमी पर्व के अवसर पर जूनी इन्दौर क्षेत्रान्तर्गत श्री बेलेश्वर झूलेलाल मंदिर मे स्थित पुरानी बावड़ी के ढह जाने से वृहद संख्या मे जनहानि हुई है। शाजापुर जिले अन्तर्गत भी यदि इस प्रकार की बावडी, कुओ, बोरवेल या ऐसी जल संरचनाओ को ढक दिया गया हो या उन्हें असुरक्षित तरीके से खुला छोड दिया गया हो या उन पर कमजोर छत या छज्जा लगाकर अन्य उपयोग किया जा रहा हो और जो सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त नही है। मानव जीवन को भविष्य मे इस प्रकार हुई घटना या आपदा से बचाने के लिए तत्काल नियंत्रण एवं रोकथाम की आवश्यकता को देखते हुए कलेक्टर एवं जिलादण्डाधिकारी श्री दिनेश जैन द्वारा भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किये गए हैं।
जिला दण्डाधिकारी द्वारा दिये गए आदेश के अनुसार शाजापुर राजस्व सीमा अन्तर्गत सभी कुए बावड़ियों या इस प्रकार की अन्य संरचनाओ पर हुए अवैध निमार्ण एवं अतिक्रमण (छत या कमजोर छज्जा बनाकर) या अन्य किसी प्रकार से असुरक्षित स्थिति में लाया गया हो, तो तत्काल जांच कर सुरक्षित कराना आवश्यक है। नगर पालिका एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में सभी स्थानीय नगरीय निकायो के सी.एम.ओ अपने क्षेत्रो में स्थित बावड़ियों/कुओ का सर्वे कराकर सूची संधारित करें। उक्त सूची में स्थल का नाम भूमि स्वामी सर्वे नम्बर भी अकिंत करें। उक्त संरचना को किस तरह असुरक्षित किया गया है उसका विवरण दें। साथ ही फोटोग्राफ भी संधारित करें। यदि कही किसी बावडी/कुओं या ऐसी गहरी संरचना पर अतिक्रमण हो या उसे कमजोर छत बनाकर या छज्जा आदि अन्य किसी प्रकार से ढंक दिया हो, या कोई दीवार आदि निर्मित कर घातक स्थिति उत्पन्न की हो तो पृथक से खतरनाक संरचना की सूची में रखें। खतरनाक संरचना की सूची के प्रत्येक मामलो मे नियमों एवं अधिनियमों के तहत अतिक्रमण हटाये जाने एवं सुरक्षा के सभी उपाय संबधित व्यक्ति/संस्था के माध्यम से सुनिश्चित कराने की कार्यवाही करें। ग्रामीण क्षेत्र के अन्तर्गत जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव का यह दायित्व है कि वह अपने क्षेत्रों मे स्थित सभी बावडियां, कुओं, खुले बोरवेल के गडडो का सर्वे कराएं एवं सूची संधारित करें। उक्त सूची में स्थल का नाम भूमि स्वामी का नाम सर्वे नम्बर अकिंत करें। साथ ही फोटोग्राफ भी संधारित करें। ऐसी किसी गहरी संरचना पर अतिक्रमण हो या उसे कमजोर छत बनाकर या छज्जा आदि अन्य किसी प्रकार से ढंक दिया हो, या कोई दिवार आदि निर्मित कर घातक स्थिति निर्मित की हो, तो पृथक से खतरनाक संरचना की सूची में रखें।
खतरनाक संरचना की सूची के प्रत्येक मामलो मे तत्काल नियमों एवं अधिनियमों के तहत अतिक्रमण हटाये जाने एवं सुरक्षा के सभी उपाय संबंधित व्यक्ति एवं संस्था के माध्यम से सुनिश्चित कराने की कार्यवाही करें। उक्त कार्य में संबधित कार्यपालिक दंडाधिकारी (तहसीलदार/नायब तहसीलदार) आवश्यक सहयोग करते हुए सुरक्षा के समस्त उपायों को सुनिश्चित कराएंगे। 15 दिवस में उपरोक्तानुसार कार्यवाही संपादित करते हुए की गई कार्यवाही की समस्त जानकारी की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यदि कही इस प्रकार के खतरनाक कुओं, बावडी की जानकारी किसी के संज्ञान में आती है तो संबधित क्षेत्र के अनुविभागीय दंडाधिकारी, जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नगर पालिका एवं नगर पंचायत में इसकी सूचना देना आवश्यक है। साथ ही वह कलेक्टर कार्यालय में आपदा नियंत्रण कक्ष के दूरभाष नम्बर 94245-33270 पर इसकी सूचना दे सकते हैं। इसी तरह खुले हुये शासकीय या निजी बोरबेल जिनमे बच्चों के गिरने की दुर्घटनायें होना संभावित हो, को भी तत्काल चिन्हित कर बंद कराएं। संबधित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (ग्रामीण क्षेत्र), नगरीय निकाय (शहरी क्षेत्र) व निजी भूमि स्वामी अपने-अपने क्षेत्राधिकार में उक्त कार्यवाही 15 दिवस में पूर्ण कर प्रतिवेदन अनुविभागीय दंडाधिकारी एवं तहसीलदार कार्यालय में जमा करायेंगे। कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं समस्त मुख्य नगर पालिका अधिकारी व मुख्य नगर पंचायत अधिकारी यह प्रमाण पत्र देंगे कि उनके क्षेत्रान्तर्गत ऐसे सभी स्थानो को सुरक्षित कर दिया गया है।
यह आदेश दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 (2) के अन्तर्गत एक पक्षीय रूप से पारित किया गया है। इस आदेश से व्यथित व्यक्ति दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 ( 5 ) के अन्तर्गत अधोहस्ताक्षरकर्ता के न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकेगा। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करेगा तो वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के अन्तर्गत अभियोजन के लिये उत्तरदायी होगा। उक्त आदेश 31 मई 2023 तक प्रभावशील रहेगा।
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